बाराबंकी। बदलते जलवायु परिदृश्य और बढ़ती कृषि लागत के बीच बाराबंकी के प्रगतिशील किसान बिपिन वर्मा ने देसी बीजों के संरक्षण की सार्थक पहल की है, जो खेती की तस्वीर बदल देगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से लाकर दुबराज, बादशाह भोग और श्यामजीरा जैसी धान की 30 पारंपरिक प्रजातियों का स्थानीय बीज बैंक तैयार किया है।
चयन विधि से उत्पादित ये बीज कम वर्षा और प्रतिकूल मौसम में भी 14 से 18 क्विंटल प्रति एकड़ तक पैदावार देने में सक्षम हैं। योगी सरकार की ओर से मिलेट्स (श्री अन्न) को बढ़ावा देने, पोषण सुरक्षा और किसानों की आमदनी बढ़ाने के प्रयासों के बीच यह आत्मनिर्भर प्रयोग एक बड़ी मिसाल है।
इस मुहिम को विस्तार देने के लिए गांव के युवाओं को मध्य प्रदेश के बीज संरक्षक पद्मश्री बाबूलाल दहिया के पास भेजा गया था। वहां से वे लोचन, झलरी, सरैया और वेदिका जैसी 10 दुर्लभ पारंपरिक किस्में लेकर लौटे हैं, जो बेहद कम लागत में तैयार होती हैं।