बाराबंकी। परिषदीय स्कूलों में अध्यापन छोड़ शिक्षक अब कागजी काम में जूझने को मजबूर हैं। पंचायत स्तर से काम न हो पाने के कारण छात्रवृत्ति और डीबीटी के लाभार्थी विद्यार्थियों की फैमिली आईडी जनरेट करने की जिम्मेदारी अब शिक्षकों को सौंपी गई है।
मुख्य विकास अधिकारी अन्ना सुदन के इस आदेश के बाद पंचायत सहायकों और सचिवों का मूल काम शिक्षकों को पूरा करने से विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई के साथ ही अन्य काम भी प्रभावित हो रहे हैं।
अभिभावकों के दस्तावेज जुटाने और पोर्टल पर सत्यापन में शिक्षकों का पूरा दिन बीत रहा है, जिससे पठन-पाठन ठप है। सबसे बड़ी चुनौती पासआउट होकर जा चुके बच्चों का रिकॉर्ड खंगालने में आ रही है। ब्लॉक के अफसर अपनी जवाबदेही से बचने के लिए शिक्षकों पर लगातार दबाव बना रहे हैं। परिषदीय स्कूल के 14,478 के लक्ष्य के सापेक्ष केवल 1,434 बिना राशन कार्ड वाले परिवारों की फैमिली आईडी बनी हैं, जबकि 10,013 मामले लंबित हैं।
ब्लॉकवार स्थिति देखें तो निंदूरा में सर्वाधिक 1,356, बंकी में 974, त्रिवेदीगंज में 926, हैदरगढ़ में 872, देवा में 830, सूरतगंज में 693, फतेहपुर में 632, रामनगर में 541, सिद्धौर में 531 और बनीकोडर में 504 मामले लंबित हैं। सबसे कम लंबित मामले नगर क्षेत्र में 66 दर्ज किए गए हैं।बीएसए नवीन कुमार पाठक ने बताया कि शासन स्तर से इसकी दैनिक समीक्षा हो रही है। दो दिन में विशेष अभियान चलाकर लंबित फैमिली आईडी का काम पूरा कराने का टॉस्क है।