जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में पौने बारह बजे ह्दय रोगी का इलाज करते कर्मचारी।
बाराबंकी। जिला अस्पताल की इमरजेंसी... मंगलवार रात करीब आठ से 12 बजे... ठंड के बीच मरीज पहुंच रहे थे। कुछ जख्मी तो कुछ दर्द से परेशान। इस दौरान यहां हृदयरोग के मरीज भी आ रहे थे। कर्मचारी दौड़ रहे थे, ऑक्सीजन लगाया जा रहा था। डॉक्टर कोशिश में लगे थे। लेकिन इलाज से पहले ही सिस्टम की नाकामी से धड़कनें थमने लगीं। 40 लाख की आबादी वाले जिले में हृदय रोग के उपचार के इंतजाम न होने से लोग सिस्टम पर सवाल उठा रहे थे।
रात आठ बजे के बाद ठंड के बीच सीने में दर्द से कराहते एक मरीज को परिजन इमरजेंसी लेकर पहुंचे। इंटर्न छात्र ने प्राथमिक जांच की और डॉक्टर को बुलाया गया। इंजेक्शन और उपचार के बाद मरीज को मृत घोषित कर दिया गया। नर्सिंग स्टाफ और वार्डबॉय लगातार दौड़-भाग करते रहे, लेकिन हृदय रोग के इलाज की व्यवस्था न होने से सब बेबस नजर आए।
करीब 11.30 बजे बंकी निवासी करीब 50 साल के व्यक्ति को अचेत हालत में लाया गया। डॉक्टरों ने हार्ट अटैक की आशंका जताई। ईसीजी कराई गई। कर्मचारी उपकरण जुटाने में लगे रहे, लेकिन करीब 20 मिनट बाद उन्हें भी मृत घोषित कर दिया गया। इसके ठीक दस मिनट बाद सांस लेने में दिक्कत से जूझते एक वृद्ध को लाया गया। ऑक्सीजन दी गई, मगर सुधार न होने पर ईएमओ ने हार्ट का डॉक्टर न होने की बात कहकर उसे केजीएमयू रेफर कर दिया। महज चार घंटे में दो मौत हो गई और एक मरीज को रेफर कर दिया गया। मरीजों के परिजन सिस्टम पर सवाल उठा रहे थे। उनका कहना था कि अगर अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था होती तो शायद उनके मरीज की जान बच जाती। सीएमएस डॉ. जेपी मौर्या ने बताया कि हृदयरोग का चिकित्सक नहीं है। शासन को पत्र लिखा गया है।