बाराबंकी। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव और वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर अब जिले के वाहन बाजार में भी साफ दिखाई दे रहा है। पेट्रोल-डीजल पर बढ़ते खर्च से राहत पाने के लिए लोग तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं। जिले में एक वर्ष के भीतर इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण लगभग दोगुना हो गया है।
एआरटीओ कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार पहले जिले में करीब 3900 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत थे। अब इनकी संख्या बढ़कर करीब 8000 पहुंच गई है। इनमें इलेक्ट्रिक स्कूटी, बाइक, कार, ई रिक्शा, ई लोडर और ऑटो शामिल हैं।
यह वृद्धि बताती है कि अब लोग केवल वाहन खरीदने की कीमत नहीं बल्कि उसके संचालन पर होने वाले खर्च को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। कम परिचालन लागत और पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण इलेक्ट्रिक वाहन लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।
कम खर्च, ज्यादा बचत का भरोसा
वाहन एजेंसियों से जुड़े कारोबारियों के अनुसार पिछले एक वर्ष में इलेक्ट्रिक स्कूटी और ई रिक्शाें की मांग में बढ़ोतरी हुई है। पहले चार्जिंग सुविधा और बैटरी की उम्र को लेकर लोगों में संकोच रहता था, लेकिन बैटरी तकनीक में सुधार, चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं से उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ा है।
नौकरीपेशा और छोटे कारोबारियों की पहली पसंद
रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और छोटे कारोबारियों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन आर्थिक रूप से अधिक लाभदायक साबित हो रहे हैं। पेट्रोल-डीजल पर होने वाला दैनिक खर्च बचने से हर महीने अच्छी-खासी बचत हो रही है। यही वजह है कि जिले में ईवी का ग्राफ लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
वर्जन-
जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण लगातार बढ़ रहा है। पहले करीब 3900 ईवी पंजीकृत थे। एक साल में संख्या करीब 8000 हो गई है। यह दर्शाता है कि लोग तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपना रहे हैं।
- अमिताभ राय, एआरटीओ प्रशासन