पीड़ित अशोक कुमार के मुताबिक, प्राथमिक विद्यालय में सुबह करीब 10 बजे उनके बेटे अंशू को सांप ने काटा था। उसे 1:55 बजे सीएचसी हैदरगढ़ लाया गया, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया था। घटना के वक्त स्कूल में शिक्षामित्र अमिता सिंह ही मौजूद थीं। हेडमास्टर ऑडिट के सिलसिले में बीईओ ऑफिस गए थे।
70 बच्चों के अकेले शिक्षामित्र संभाल रही थीं। इस प्रकरण में स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप है। कार्रवाई को लेकर सोमवार को सीएचसी और मंगलवार को कोतवाली में भी प्रदर्शन भी किया गया। इसी मामले में जांच टीम दोपहर करीब 12:30 बजे स्कूल पहुंची। वहां हेडमास्टर सुरेंद्र कुमार और शिक्षामित्र अमिता सिंह से लिखित में बयान लिया गया।
इसके अलावा कक्षा-तीन के चार व कक्षा-चार के एक छात्र से घटना के बारे में पूछा गया। बयान में क्या बात सामने आई, ये सार्वजनिक नहीं किया गया। दोपहर करीब तीन बजे टीम स्कूल से लगभग दो किलोमीटर दूर पोखरा चौकी पहुंची। वहीं पर अंशू के माता-पिता व अन्य परिवारीजन के बयान दर्ज किए गए। लगभग 45 मिनट बाद टीम बाराबंकी लौट गई। एडीएम निरंकार सिंह ने बताया कि तहसील प्रशासन की रिपोर्ट के बाद परिजनों के खाते में मुआवजे की धनराशि भेज दी गई है।
छुट्टी पर थीं दो शिक्षिकाएं
घटना के दिन विद्यालय में तैनात दो शिक्षिकाएं छुट्टी पर थीं। प्रधानाध्यापक सुरेंद्र कुमार 70 नौनिहालों को शिक्षामित्र के सहारे छोड़ बीआरसी चले गए थे। उन्होंने अगल-बगल के स्कूल में तैनात शिक्षकों से मदद नहीं ली। दो शिक्षिकाओं को एक साथ छुट्टी देना नियमों का उल्लंघन बताया जा रहा है।
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पोखरा चौकी में दबाव के बीच दर्ज हुए बयान
बढ़इन पुरवा गांव में रोते-बिलखते परिजन करीब दो घंटे तक अधिकारियों का बाट जोहते रहे। जांच टीम गांव की चौखट पर जाने के बजाय सीधे पोखरा चौकी में जम गई। मृतक की मां शिवदेवी, पिता अशोक कुमार, रामराज और कौशल किशोर का आरोप है कि पुलिसिया कार्रवाई का खौफ दिखाकर उन्हें चौकी बुलाया गया और बंद कमरे में बयानों की कागजी औपचारिकता पूरी की गई।
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मनचाही गवाही कराने की चर्चा
दर्दनाक हादसे के बाद से ही अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से घबरा रहे हैं। घटना के दिन पंजीकृत 85 में से 70 बच्चे मौजूद थे जबकि बुधवार को विद्यालय में महज 17 छात्र ही पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि इन गिने-चुने बच्चों को भी जांच अधिकारियों की सहूलियत के हिसाब से मनमाफिक बयान दिलवाने के लिए ही बुलवाया गया था।
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कांप रहे थे शिक्षामित्र के हाथ
जांच टीम के साथ स्कूल में मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि पूछताछ के दौरान खौफजदा शिक्षामित्र अमिता सिंह के हाथ इस कदर कांप रहे थे कि उन्हें अपना पक्ष लिखने में काफी वक्त लग गया। अधिकारियों ने ये भी देखा कि स्कूल परिसर में विद्युत पोल लगा है। इस पोल तक एचटी लाइन आई है। इसी से स्कूल का कनेक्शन किया गया है।
दो दिन में सौपेंगे रिपोर्ट
दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। दो दिन के अंदर जांच पूरी कर रिपोर्ट डीएम को सौंप दी जाएगी।
- राजकुमार सिंह, एडीएम न्यायिक
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