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Barabanki News: तेज हवा व बारिश से गिरी धान की फसल, किसान परेशान

Sun, 05 Oct 2025 12:54 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। जिले में शुक्रवार रात से शनिवार सुबह तक हुई बारिश ने हजारों किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। रात में तेज हवा के साथ हुई बारिश से खेतों में तैयार धान की अगेती फसल गिर गई। जलभराव से फसल के सड़ने की आशंका है।
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बाराबंकी में कुल 1.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती है। जिससे 4.56 लाख किसान जुड़े हैं। इनमें से करीब 60,000 हेक्टेयर में अगेती धान की बोआई हुई थी, जिसकी बालियां अब पक चुकी थीं। बारिश से 20 हजार हेक्टेयर में फसल गिरने की सूचना है।
कृषि विभाग के शुरुआती अनुमान के अनुसार कुल फसल में से 12 से 15 प्रतिशत नुकसान का आकलन किया है। दरअसल, धान की अगेती फसल वह है जिनकी बलिया पकने वाली है या पक गई है। कहीं-कहीं तो कटान भी शुरू हो गई है। ऐसे में शुक्रवार रात से शनिवार सुबह तक जिले में 24 मिमी बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 60 मिमी बारिश हैदरगढ़ तहसील में हुई। जबकि सबसे कम दो मिमी बारिश सिरौली गौसपुर तहसील में दर्ज की गई। इस बारिश ने जिले के हजारों किसानों की मेहनत पर पानी फेरने जैसा असर डाला है। धान के साथ-साथ सब्जी उत्पादक किसान भी बेमौसम बारिश से परेशान हैं। टमाटर, लौकी, परवल और बैंगन की फसलें पानी में डूबने से सड़ने का खतरा हैं। हालांकि शनिवार को तेज धूप निकलने से किसानों को राहत मिली है और वह उम्मीद कर रहे हैं कि अब बारिश न हो।
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फोटो: 21
दाना काला पड़ने का खतरा, उत्पादन प्रभावित
बारिश में धान की अगेती फसल गिर गई है। अगर और बारिश हुई तो दाना काला पड़ जाएगा। इससे फसल की कीमत आधी रह जाएगी। अगर और पानी बरसा तो खेतों में ही धान उग आएगा।
- प्यारेलाल, किसान गवारी



फोटो: 22
सर्वे करवा कर मुआवजा दे सरकार
धान की फसल बेचकर ही किसान अगली फसल की तैयारी करता है। जिन किसानों की फसल गिर गई है उनका सर्वे कराकर सरकार को मुआवजा देना चाहिए।
- प्रमोद वाजपेई, किसान, बंकी



नमी से उपज और गुणवत्ता पर पड़ेगा असर
धान के गिरने से दानों में नमी बढ़ जाती है। इससे उपज की गुणवत्ता घटती है और मंडियों में खरीद के दौरान आढ़तियों द्वारा कीमत कम दी जाती है। सरकारी खरीद केंद्रों पर तय मानक के अनुसार 17 प्रतिशत से अधिक नमी होने पर धान की खरीद नहीं होगी। अधिक नमी से धान में फफूंद लगने की आशंका रहती है और चावल की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। इसलिए किसान अब मौसम साफ होने की दुआ कर रहे हैं ताकि समय रहते फसल काटकर सुखा लें।


दो दिन में फसल न काटी तो जमने लगेगी बाली
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश में गिरी फसल को एक-दो दिन में नहीं काटा गया, तो धान की बालियों में अंकुरण (जमाव) शुरू हो जाएगा। ऐसे में दाना सड़ने लगता है और चावल नहीं बन बनेगा। इससे उपज का 30-40 प्रतिशत तक नुकसान संभव है।
वहीं, जिला कृषि अधिकारी राजित राम ने किसानों से अपील की कि खेतों में पानी जमा न होने दें। जिन खेतों में जलभराव है, वहां निकासी की व्यवस्था करें। पानी सूखने के बाद फसल को सीधा करने का प्रयास करें।
फैक्ट फाइल
- कुल धान का रकबा
: 1.92 लाख हेक्टेयर
- अगेती धान क्षेत्र 60 से 70 हजार हेक्टेयर
- प्रभावित क्षेत्र
5 से 10 हजार हेक्टेयर
- नुकसान का अनुमान 15 से 20 प्रतिशत
- किसानों की संख्या
4.56 लाख
- औसत बारिश 24 मिमी

15 साल बाद हुई अक्तूबर में इतनी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार पिछले दस वर्षों में अक्तूबर के पहले सप्ताह में इतनी अधिक बारिश जिले में पहले कभी नहीं हुई। वर्ष 2009-10 में बारिश से काफी नुकसान हुआ था। आमतौर पर इस अवधि में 5 से 10 मिमी औसत वर्षा दर्ज की जाती है,लेकिन इस बार यह ढाई गुना से भी अधिक रही।
इनसेट
लेट किस्म के धान को बरसात ने दी राहत
बारिश ने जहां अगेती धान की फसल को नुकसान पहुंचाया है वहीं सुगंधित और लेट किस्म के धान के लिए यह फायदे की बारिश साबित हो सकती है। कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि लेट वैरायटी की फसलों को इस समय थोड़ी नमी और ठंडक मिलना उनके विकास के लिए फायदेमंद है। 80 से 90 हजार हेक्टेयर में ऐसी फसल का अनुमान है।
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