असंद्रा थाना क्षेत्र के पकरिहा गांव निवासी श्रीकांत की मौत के बाद गमगीन वृद्ध मां।
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गरीबी के साथ 40 साल का लंबा सफर तय करने बाद आखिर श्रीकांत जिंदगी की जंग हार गया। दोपहर करीब 11:30 बजे श्रीकांत ने आंखें मूंदी और दुनिया को अलविदा कह गया। यह सब उसकी 70 साल की बूढ़ी मां की आंखों के सामने हुआ।
लेकिन वह बेबस रही और तिलतिल कर अपने बच्चे को मौत के नजदीक जाते देखती रही। लेकिन श्रीकांत की मौत ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम के पालन में हो रही मनमानी की कलई खोल दी है। हालांकि प्रशासन पूरे मामले को दबाने पर जुटा है।
असंद्रा थाना क्षेत्र के पकरिहा गांव में रहने वाले श्रीकांत (40) पुत्र स्व. विशम्भरनाथ दीक्षित अपनी जीर्ण शरीर के साथ आंखें खोल कर शून्य को निहारे जा रहा था। रविवार की सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे श्रीकांत ने शून्य में निहारते हुए जिंदगी की आखिरी सांस ली।
इस मौके पर उसके पास सिर्फ उसकी मां कल्यानी देवी रही। जो अपने कोख से जने को अपने सामने तिलतिल कर मरता देख रही थी। बेबसी इतनी की अपने जवान बेटे के लिए भगवान से प्रार्थना के अलावा कुछ भी नहीं कर सकीं। श्रीकांत की आंख बंद होते ही मां कल्यानी की सांसे जैसे एकाएक थम गईं।
चेतना आने पर उन्होंने अपनेे जवान बेटे के शव के सिरहाने उपले जलाकर रखे। शव के पास भी वह अकेले ही रही। इस दौरान कल्यानी को अपनी गरीबी पर गुस्सा आ रहा था तो बेटे की मौत से मन भी रोआसा हो उठता। लेकिन टूट चुकी बुढ़ाने की लाठी ने उन्हें इतना स्तब्ध कर दिया कि आंखों से जैसे आंसू ही सूख गए हों।