बाराबंकी। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई और व्यवस्थाओं को हाईटेक बनाने का सपना अब तक अधूरा है। इसके चलते परिषदीय विद्यालयों में 12 जरूरी रजिस्टरों को डिजिटल बनाने का काम बीते डेढ़ साल से अधूरा पड़ा है। हालत यह है कि अब तक सिर्फ छात्रों की हाजिरी और मिड डे मील को ही ऑनलाइन किया जा सका है। बाकी 10 रजिस्टरों का काम अभी भी कागजों में ही सिमटा है।
शासन स्तर से शिक्षकों की हाजिरी से लेकर स्कूल के सभी रजिस्टर डिजिटल किए जाने का आदेश बीते साल जारी किया गया था। इसके लिए जिले को नवंबर 2023 में 4200 टैबलेट भी मिले थे। रजिस्टरों को डिजिटल बनाने की शुरुआत जोश के साथ हुई लेकिन कुछ समय बाद ही शिक्षकों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि यह व्यवस्था उनके लिए परेशानी और मानसिक दबाव का कारण बन रही है। शिक्षकों के विरोध के आगे विभाग ने भी इसके अनुपालन में नरमी बरत ली।
इसके चलते ही विद्यालयों में ऑनलाइन हाजिरी की प्रक्रिया भी अधूरी है। साथ ही रजिस्टरों को पूरी तरह से डिजिटल बनाने का काम भी ठप है। दो को छोड़ बाकी 10 रजिस्टरों का काम ठंडे बस्ते में है। इसे लेकर विभागीय अफसरों की तरफ से भी कोई सख्ती नहीं दिख रही है। इसे लेकर शिक्षकों का विरोध भी जारी है। बीएसए संतोष देव पांडेय ने बताया कि मौजूदा समय में दो रजिस्टर डिजिटल हो चुके हैं। बाकी रजिस्टरों की प्रक्रिया चल रही है। शासन के निर्देशों का पालन जल्दी सुनिश्चित कराया जाएगा।
यह 12 रजिस्टर होने हैं डिजिटल
विद्यालयों में इस्तेमाल होने वाले 12 रजिस्ट्ररों को डिजिटल बनाया जाना था। इसके तहत उपस्थिति पंजिका, प्रवेश पंजिका, कक्षावार छात्र उपस्थिति पंजिका, एमडीएम पंजिका, समेकित निशुल्क सामग्री वितरण पंजिका, स्टॉफ पंजिका, आय-व्यय एवं इश्यू पंजिका, बैठक पंजिका, निरीक्षण पंजिका, पत्र व्यवहार पंजिका, बाल गणना पंजिका, पुस्तकालय एवं खेलकूद पंजिका रजिस्टर को प्रस्तावित किया गया था।