बाराबंकी। बिजली के भारी भरकम बिल से राहत पाने और जेब का बोझ हल्का करने के इरादे से जिन उपभोक्ताओं ने छतों पर सोलर पैनल लगवाए थे, स्मार्ट मीटरों ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया है। लोग स्मार्ट मीटर की इस खामी के कारण अब सोलर पैनल लगवाने से बचने लगे हैं।
हालात यह हैं कि सोलर लगाने के बाद बिल कम होने के बजाय और बढ़ गए हैं। उपभोक्ता सरिता, मोहिनी और मंजू का कहना है कि जिनके घरों में पहले के सामान्य नेट मीटर लगे हैं, वो तो सोलर का पूरा लाभ ले रहे हैं लेकिन नए स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं को दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है। उपभोक्ता राकेश और अनूप ने बताया कि नॉर्मल मीटर के दौर में जितना बिल आता था, अब छत पर सोलर पैनल चमकने और स्मार्ट मीटर लगने के बाद उससे भी ज्यादा बिल चुकाना पड़ रहा है।
पावर कॉर्पोरेशन के अधिशासी अभियंता घनश्याम त्रिपाठी ने बताया कि स्मार्ट मीटरों में नेट-मीटरिंग का पूरा प्रावधान है। शासन से सोलर पैनल के साथ स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य कर दिया है। यदि किसी उपभोक्ता के यहां रीडिंग में भिन्नता की शिकायत आ रही है तो उसकी जांच कराकर सॉफ्टवेयर अपडेट या मीटर री-कैलिब्रेट कराया जाएगा।
तकनीकी पेंच में क्रेडिट गायब, बिल पूरा
ग्रिड-कनेक्टेड सोलर सिस्टम में दिन के वक्त पैदा हुई अतिरिक्त बिजली पावर कॉरपोरेशन के ग्रिड को भेजी जाती है और रात में ग्रिड से बिजली ली जाती है। पुराने मीटरों में दोनों का अंतर निकालकर बिल बनता था। लेकिन स्मार्ट मीटरों में एक्सपोर्ट रीडिंग या तो सही दर्ज नहीं हो रही या सॉफ्टवेयर में नेट-मीटरिंग का सिंक न होने से उपभोक्ताओं को अपनी ही बनाई बिजली का क्रेडिट नहीं मिल पा रहा है।