भारत सरकार द्वारा 500 व 1000 की करेंसी बंद किए जाने के बाद लोगों ने घरों में रखी करेंसी को ठिकाने लगाने की होड़ लग गई थी। लोगों ने पुराने खाते के अलावा नए खाते खुलवा कर पैसे उसमें डलवाएं। हालांकि आवश्यकता वाले खातों में अभी लंबी रकम नहीं जमा कराई गई।
विभाग के लोगों की माने तो जिले के सभी डाकघरों में पिछले 18 दिनों में करीब 40 करोड़ रुपये विभिन्न खातों में जमा हुए। जबकि इन दिनों में करीब छह हजार नए खाते खोले गए। सभी पोस्ट ऑफिसों में करीब 45 लाख रुपये की करेंसी बदली गई।
प्रधानमंत्री की नोटबंदी की घोषणा के बाद से वीरान से पड़े रहने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के डाकघरों की रौनक बढ़ गई थी। पिछले 9 नवंबर से जिले के सभी डाकघरों में करीब छह हजार खाते खोले गए। विभागीय लोगों की माने तो सभी डाकघरों के खातों में पिछले 18 दिनों में 40 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, जितना पैसा जमा हुआ है, उसमें करीब 70 फीसदी नोट 500 की और करीब 30 फीसदी नोट एक हजार की है। अभी भी लोगों द्वारा पैसा खातों में जमा किए जा रहे हैं। इसके अलावा पिछले 16 दिनों में सभी पोस्ट ऑफिसों के माध्यम से करीब 45 लाख रुपये की करेंसी की अदला-बदली की गई है।
बताते चलें कि जिले में एक प्रधान डाकघर और इसकी 39 शाखाएं हैं। इस सभी में करीब पांच लाख खाते हैं। विभागीय लोगों की माने तो सभी डाकघरों में करीब दो लाख करंट अकाउंट हैं। इसके अलावा नौ नवंबर से अब तक करीब छह हजार नये खाते खोले गए हैं।
प्रधान डाकघर में पैसा जमा करने आए नीरज ने बताया कि बैंकों में खाता खुलवाने को लेकर काफी मारामारी है। जिसके चलते लोगों का रुझान डाकघरों में खाता खुलवाने में अधिक रहता है। आदित्य यादव भी पोस्ट ऑफिस में पैसा जमा करने आए थे।
यह बताते हैं कि जब से नोट बंदी हुई है तब से बैंकों में लंबी लाइनें हैं। उनके पास पर्याप्त जगह भी नहीं है। जबकि पोस्ट ऑफिस में धन निकासी, जमा या एक्सचेंज व अन्य कार्य समान रूप से चल रहा था। जिसके चलते यहां पर खाता खुलवाने के लिए दिक्कत नहीं थी। लोग पोस्ट ऑफिस में खाता खुलवाने में रुचि ले रहे हैं।