कड़कड़ाती ठंड और हिमपात से जान बचाने की खातिर सात समन्दर पार से आए मेहमान परिन्दों ने क्षेत्र की झीलों के किनारे आशियाना बनाना शुरू कर दिया है। झीलों के किनारे शांत वातावरण में घने पेड़ों पर डेरा जमाने वाले यह मनमोहक माइग्रेटी (प्रवासी) यहां प्रवास के दौरान प्रजनन भी करते हैं।
साइबेरिया, रूस, जापान, तिब्बत आदि देशों से हजारों मील का सफर तय कर यह पक्षी यहां आते हैं और गर्मियों के दस्तक देते ही यह अपने वतन लौट जाते हैं। देवा क्षेत्र के प्रमुख झीलों में विदेशी परिंदों का आगमन लोगों के कौतूहल का केंद्र बना हुआ है।
वर्तमान में क्षेत्र के खजुआ झील में बड़ी संख्या में मेहमान परिंदे ओपेन बिल्ड स्टार्क, ब्रहानी डक, डेवसिक, कारमेंट, समन तथा लंबी और पीली चोंच वाले पेटेंट स्टार्क, हेडेड गोज, ब्लू चील्ड बीटर, ब्लैक टर्न, कामन टील व कामन रेड आदि विदेशी पक्षी आते हैं।
सैकड़ों बीघा में फैली इस खजुआ झील में स्वछंद होकर अठखेलियां करते इन परिंदों का कलरव वातावरण में एक अजीब सी हलचल पैदा कर देता है। इन खूबसूरत पक्षियों द्वारा प्रकृति के सानिध्य में की जाने वाली क्रीड़ाएं लोगों के आकर्षण का केंद्र रहती है। साइबेरियन चिड़िया नाम से जानी जाने वाले यह परिंदे ठंड में साइबेरिया रूस आदि देशों के हिमपात के चलते यहां आसरा लेते हैं। और शांत झीलों के किनारे घने पेड़ों पर अपना ठिकाना बनाकर अंडे देते हैं।