बाराबंकी। दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा मिली मगर 82 साल के कैदी रामदेव को न आंखों से दिखता है न ही वह चलने-फिरने में समर्थ है। ऐसी हालत में राज्यपाल ने दया के आधार पर मात्र छह साल बाद ही रामदेव को बाराबंकी जेल से मुक्त कर देने का आदेश दे दिया है। यह रिहाई मानवीय आधार पर दी गई है। अब बाकी का जीवन रामदेव अपने परिजनों के साथ बिताएंगे।
यह मामला वर्ष 2018 का है, जब असंद्रा थाना क्षेत्र के एक गांव में एक किशोरी से दुष्कर्म के आरोप में रामदेव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। करीब तीन साल मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद 23 मार्च 2021 को पॉक्सो एक्ट कोर्ट-46 के अपर सत्र न्यायाधीश ने भवनियापुर गांव के रामदेव को उमकैद की सजा सुनाई थी।
जेल पहुंचने के बाद रामदेव की शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। धीरे-धीरे उनकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई और अब वह पूरी तरह से दृष्टिहीन हो चुके हैं। अत्यधिक कमजोरी के चलते वह चलने-फिरने में भी असमर्थ हैं और अधिकतर समय जेल अस्पताल के बेड पर ही गुजरता है। इसी बीच परिजनों की पहल पर जेल प्रशासन ने उनकी ओर से दया याचिका शासन को भेजी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि रामदेव का जेल में आचरण संतोषजनक रहा है। अब तक वह करीब छह वर्ष की सजा काट चुके हैं।
मामला जब शासन स्तर से होते हुए राज्यपाल के समक्ष पहुंचा तो संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत प्रदत्त विशेषाधिकारों का प्रयोग करते हुए उनकी सजा में छूट देने का निर्णय लिया गया। दो अप्रैल को रिहाई का आदेश जारी कर दिया गया। संवाद