दो साल पूर्व किडनी चोरी के मामले में लखनऊ मेडिकल कॉलेज के दो सर्जन समेत तीन के खिलाफ दर्ज केस की पुलिस ने विवेचना शुुुरू कर दी है। पूरे प्रकरण पर नामजद किए गए दोनों सर्जनों का कहना है कि इमरजेंसी ऑपरेशन के दौरान किडनी की चोरी होना संभव ही नहीं है।
कोठी थाना क्षेत्र के भवानी गांव निवासी युवक पृथ्वीराज फरवरी 2015 में ट्रैक्टर-ट्रॉली से गिर गया था। जिससे उसकी आंत फट गई थी। ऐसे में जिला अस्पताल से उसे लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया था। जहां ऑपरेशन के बाद वह ठीक होकर घर आ गया। शनिवार को पृथ्वीराज ने एसपी से मिलकर एक शिकायती पत्र दिया।
जिसमें किडनी चोरी किए जाने का आरोप लगाया गया है। उधर, ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक संदीप तिवारी का कहना है कि वर्ष 2015 में ट्रैक्टर से गिरकर घायल युवक जब इमरजेंसी में लाया गया तो उसके पेट की आंत कई जगह से फटी थी।
उसकी आंतें बाहर निकल आई थीं। ऐसे में मेरे जूनियर डॉक्टरों की टीम ने काफी मेहनत कर सफल ऑपरेशन किया। डॉ. तिवारी का कहना है कि किडनी प्रत्यारोपित करने के लिए ब्लड व किडनी की मैचिंग कराई जाती है।
उसके बाद किडनी प्रत्यारोपित की जाती है। इतना ही नहीं इमरजेंसी में ऑपरेशन के समय करीब 15 स्टाफ रहता है। ऐसे में किडनी प्रत्यारोपित किया जाना किसी भी दशा में संभव नहीं है। उसकी जांच कराएंगे तभी सही तथ्य सामने आ पाएंगे।