13 देशों की 33 सदस्यीय टीम ने बृहस्पतिवार को प्रगतिशील किसान रामसरन के गांव टेरा दौलतपुर पहुंची। टीम में कृषि वैैज्ञानिक, बैंकों के अधिकारी और फाइनेंस विभाग के अधिकारी शामिल थे।
इन अधिकारियों ने केले और टमाटर की खेती देखने के साथ आने वाली लागत और होने वाली आय की जानकारी ली। इनके देशों में किस तरह से खेती कि जाती है और सरकार की ओर से किसानों को कौन-कौन सी सुविधाएं दी जाती हैं इस पर भी चर्चा की।
नाबार्ड की सहयोगी संस्था बर्ड के प्रशिक्षक डॉ. श्रीनाथ रेड्डी और डॉ. कैलाश चन्द्र शर्मा की टीम 13 देशों वियतनाम, बांग्लादेश, फिलीस्तीन, तिरगिस्तान, तजाकिस्तान, कजाकिस्तान, घाना, तंजानिया, केन्या, यूगांडा, जिम्बाब्वे, सूडान और मॉरिशस के 33 अधिकारियों की टीम को लेकर प्रगतिशील किसान रामसरन वर्मा के फार्म हाउस पर पहुंची। टीम के अधिकारियों ने रामसरन से टमाटर की खेती के विषय में जानकारी ली।
जिस पर उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में वह 125 एकड़ भूमि पर टमाटर की खेती कर रहें। प्रति एकड़ करीब चार सौ क्विंटल टमाटर पैदा होता है। 60 हजार रुपये लागत आती है और 2 लाख 20 हजार रुपये की बिक्री होती है।
विदेशी मेहमानों ने पूछा कि आखिर आप इस तरह की खेती क्यों करते हैं। जिस पर उन्होंने कहा कि अन्य किसानों को प्रेरणा देने के लिए क्योंकि किसानों का मोह खेती से भंग होता जा रहा है। इसलिए उन्हें हाईटेक खेती करने को बढ़ावा दिया जा रहा है।
बताया कि प्रतिदिन करीब 15 हजार किसान उनकी वेबसाइट पर इस बाबत जानकारी लेते हैं। टीम ने जानना चाहा कि खेती करने के लिए क्या सरकारी कर्जा भी ले रखा है। जिस पर रामसरन ने बताया कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से करीब 25 लाख रुपये का कर्ज ले रखा है और वह इस पर सरकार को टैक्स भी देते हैं।
ज्यादातर देशों से आए टीम के अधिकारियों ने बताया कि उनके यहां पर गन्ना, आलू, तंबाकू, मक्का, धान आदि की खेती होती है। हमारे देश की सरकार आलू भी समर्थन मूल्य पर खरीदती है। मौजूदा समय में वियतनाम में धान का मूल्य 27 सौ रुपये प्रति क्विंटल है।
तजाकिस्तान की टीम ने टमाटर की खेती की दी जानकारी
तजाकिस्तान से आई मोखिरा और अब्दुल हकीम की टीम ने प्रगतिशील किसान से टमाटर की खेती के संबंध में कई प्रकार की जानकारियां लिया। टीम ने खेती में प्रयोग किए जाने वाले हाईटेक यंत्रों को देखा और इसकी जानकारी ली। इस दौरान वियतनाम की कृषि वैज्ञानिक दुआ ने टमाटर के पेड़ों में आने वाली टहनियों को तोड़ने की सलाह देते हुए बताया कि इससे उत्पादन बढ़ेगा।
टीम में ये विदेशी वैज्ञानिक रहे शामिल
कृषि वैज्ञानिक दुआ, सुआ वियतनाम, अमेर एनए, अहमद आईएम, इब्राहिम केएच फिलीस्तीन, लाइला, ग्लोरिया, थोबियुस, रिचर्ड जोसफ, इर्वरसन जान, इजेकिल एंड्रू, जीयोफ्रे जोसिफ केहिला और करोल तंजानिया, रितेश मारिशस, मिसेहच फोर्ब, मूसा, मूहमद,जान हेनिगटन, यूगांडा, इलियास जिम्बाबे, यूसरा आमेर उस्मान सूडान, गुलनार कजाकिस्तान, शकील अरविन, एमटी अमेनूर बांग्लादेश, माखिरा, अब्दुल हकीम तजाकिस्तान, देनार और अजेमा तिरगिस्तान, इमिनुअल सोक घाना, जोसफिन, मेडिथ अऊमा, जारेड और फ्रेडरिक केन्या के अधिकारियों की टीम शामिल रही।