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चलने लायक ही नहीं है 76 वाहन, 230 अनफिट

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बाराबंकी। जिले में स्कूली वाहनों के संचालन में लगातार लापरवाही बरती जा रही है। नोटिस व सख्ती के बाद भी 230 वाहन अभी तक अनफिट हैं। जबकि 76 वाहन ऐसे हैं जो अपनी समय सीमा पूरी कर चुके हैं। इसलिए ऐसे वाहन संचालन योग्य नहीं हैं। पूर्व में स्कूली वाहनों के संचालन की निगरानी के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। जो अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद स्वत: खत्म हो चुकी है।
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जिले में 906 स्कूली वाहन बस व वैन के रूप में दर्ज हैं। बीते अप्रैल माह में गाजियाबाद में हुए हादसे के बाद स्कूली वाहनों की छानबीन शुरू हुई थी। इसमें पता लगा था कि जिले में पंजीकृत 906 स्कूली वाहनों में करीब साढ़े तीन सौ वाहनों का फिटनेस नहीं था। कुछ स्कूली वाहनों का तो तीन-चार साल से फिटनेस नहीं था।
इसे लेकर एआरटीओ ने जब सख्ती बरतना शुरू किया तो करीब दो दर्जन वाहनों का फिटनेस कराया गया। बाकी वाहनों का फिटनेस न होने के कारण जिलाधिकारी ने कार्रवाई के निर्देश दिए थे। एआरटीओ ने 328 स्कूली वाहनों का पंजीकरण निलंबित करते हुए इन्हें ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है।
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नोटिस व सख्ती के बाद भी वाहन स्वामियों ने 306 स्कूूली वाहनों का फिटनेस नहीं कराया। स्कूूल खुलने के बाद फिटनेस के काम में तेजी नहीं आई तो निगरानी के लिए कमेटी बनाई गई। लेकिन अधिकारियों के स्थानांतरण होने के कारण कमेटी स्वत: खत्म हो गई।
नवागत एआरटीओ प्रशासन अंकिता शुक्ला ने बताया कि गहन परीक्षण करने पर यह बात सामने आई कि 230 स्कूली वाहन अभी तक अनफिट हैं। जबकि 76 वाहन ऐसे हैं जो अपनी समय सीमा पूरी कर चुके हैं। इसलिए ऐसे वाहन संचालन योग्य नहीं हैं।
फिटनेस नहीं कराया तो निरस्त होगा पंजीयन
एआरटीओ अंकिता शुक्ला ने बताया कि वे 76 वाहन जो अपनी आयु सीमा पूरी कर चुके हैं, उनका किसी भी दशा में संचालन न कराया जाए। ऐसे वाहन संचालित पाए जाते हैं या बच्चे ढोते पाए गए तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इसके अलावा जिन वाहनों का फिटनेस नहीं है, ऐसे वाहन स्वामी अपने वाहन का फिटनेस नहीं कराते हैं तो वाहन पंजीयन निरस्त किया जाएगा।
अनफिट वाहनों पर प्रतिबंध तो ई-रिक्शा से ढोने लगे बच्चे
एआरटीओ ने फिटनेस न कराने वाले 306 स्कूली वाहनों पर प्रतिबंध लगाकर ब्लैक लिस्टेड कर दिया। ऐसे में अब स्कूली बच्चों को ई-रिक्शा से ढोया जा रहा है। सड़कों पर स्कूली बच्चों को ले जा रहे इन ई-रिक्शा पर बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं है। ब्रेक लगाते ही पीछे बच्चे आपस में ही टकराते नजर आए। ई-रिक्शा में असुरक्षित सफर कर रहे हैं।
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