बाराबंकी। परिषदीय विद्यालय के बच्चे ड्रेस में स्कूल आएं इसके लिए 41 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद ज्यादातर स्कूलों में नौनिहाल बिना ड्रेस के ही पहुंच रहे हैं। खाते में पैसा आने के बाद भी ज्यादातर अभिभावकों ने ड्रेस की खरीद ही नहीं की है। अभिभावकों ने पैसा होने के बावजूद ड्रेस की खरीद क्यों नहीं की विभागीय अधिकारी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। ऐसे में सरकारी शिक्षा को बेहतर बनाने को लेकर किए जा रहे प्रयास साकार नहीं हो पा रहे हैं।
जिले में 2636 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें 1792 प्राथमिक विद्यालय, 475 पूर्व माध्यमिक विद्यालय व 369 कंपोजिट विद्यालय हैं। विद्यालयों में पठन-पाठन को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने ड्रेस कोड निर्धारित किया है। पहले यूनीफॉर्म की रकम विद्यालयों को आवंटित की जाती थी।
लेकिन पिछले साल से शासन ने इस व्यवस्था में संशोधन करते हुए डीबीटी के माध्यम से यूनीफार्म का पैसा भी सीधे अभिभावकों के खाते में भेजना शुरू कर दिया। पिछले सत्र में जिले के 3 लाख 74 हजार बच्चों के अभिभावकों के खाते में प्रति बच्चा 1100 रुपये की दर से पैसा भेजा गया। इससे दो यूूनीफॉर्म खरीदनी थी। लेकिन कुछ को छोड़कर बाकी अभिभावकों ने यूनीफॉर्म खरीदी ही नहीं।
शनिवार को विद्यालयों का हाल लिया गया तो अधिकतर बच्चे बिना यूनीफॉर्म के ही थे। दरियाबाद के प्राथमिक विद्यालय प्रथम में करीब सभी बच्चे बिना यूनीफॉर्म के मिले। प्राथमिक विद्यालय दरियाबाद के प्रधानाध्यापक मुजफ्फरुल हसन ने स्वीकार किया कि बच्चे पिछले सत्र से ही बिना यूनीफॉर्म के आए थे।
बनीकोडर ब्लॉक के जरौली, सिद्घौर ब्लॉक के बुधनई, हरख ब्लॉक के भगवानपुर समेत कई विद्यालयों में बच्चे बिना यूनीफॉर्म के मिले। इस बाबत बीएसए संतोष देव पांडेय का कहना है कि यूनीफॉर्म का पैसा अभिभावकों के खाते में गया है। उन्हें यूनीफॉर्म खरीद के लिए जागरुक किया जा रहा है।
इसी माह मिलेंगी किताबें व यूनीफॉर्म का पैसा
इस बार परिषदीय विद्यालयों में करीब 4 लाख 50 हजार बच्चे अध्ययनरत हैं। बच्चों का ब्यौरा फीड हो चुका है। इनके आधार कार्ड नहीं मिल पाए हैं। उनके लिए शिक्षक कोशिश में लगे हैं। इसी जुलाई महीने में यूनीफॉर्म का पैसा अभिभावकों के खाते में भेजा जाने लगेगा। किताबों का ऑर्डर पहले ही हो चुका था। एक सप्ताह के अंदर उनका वितरण भी शुरू हो जाएगा।
-संतोष देव पांडेय, बीएसए