कार्य पूरा होने से पहले बाढ़ की आशंका को लेकर प्रशासन अलर्ट
35 करोड़ से नदी किनारे आठ जगहों पर चल रहे हैं बचाव कार्य
हर साल 100 से 150 गांवों मेें बाढ़ से होता है काफी नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
बाराबंकी। हर साल तीन तहसीलों के करीब 150 गांवों में आने वाली सरयू की बाढ़ को लेकर तराई फिर सहम गया है। बीते पांच दिनों में सरयू का जलस्तर एक मीटर 87 सेंटीमीटर बढ़ने के बाद प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। मौजूदा समय में आठ स्थानों पर करीब 35 करोड़ से स्पर व कटान रोकने का कार्य चल रहा है मगर ये काम अगर पूरे हो जाते तो गनीमत रहती। ग्रामीणों की मानें तो, अगर बाढ़ आई तो 100 से अधिक गांव चपेट में आएंगे और बोरियां व स्पर भी डूब जाएंगे।
जून माह में अभी थोड़ी बहुत बरसात होने से ही सरयू का जलस्तर बढ़ने व घटने लगा है। एल्गिन ब्रिज के पास नदी का जलस्तर नापा जाता है। जलस्तर जब 105.070 सेमी पर पहुंचता है तो बाढ़ का खतरा शुरू हो जाता है। जबकि 106.070 के बाद नदी खतरे के निशान को पार कर लेती है। बीते 23 जून को ही सरयू का जलस्तर 102.556 था जो 28 जून को 104.426 पर पहुंच गया।
गौरतलब है कि इस बार जून में ही कसेरुवा व तटबंधों के पास सरयू नदी कटान करने लगी है। ऐसे में अगर अधिक बरसात हुई या नेपाल से पानी छोड़ा गया तो मुसीबत खड़ी हो जाएगी। ग्रामीणों के अनुसार जुलाई व अगस्त माह में बाढ़ का खतरा सामने आता है। 100 से 150 गांव इसकी चपेट में आते हैं। एडीएम राकेश सिंह ने बताया कि नदी द्वारा कटान की जा रही है मगर उस पर प्रशासन की पूरी नजर है। बाढ़ चौकियां बनाने व राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
पांच दिन में यूं बढ़ा जलस्तर
23 जून- 102.556
25 जून- 102.686
26 जून- 103.436
27 जून- 104.256
28 जून- 104.426
बांस व राहत सामग्री पहुंची कलेक्ट्रेट
बाढ़ से निपटने को लेकर प्रशासन तेजी से तैयार में जुटा है। नदी की गहराई नापने के लिए बांस की खेप कलेक्ट्रेट पहुंच चुकी है। इसी प्रकार रस्सी, लाइफ जैकेट व अन्य राहत सामग्री के करीब सवा दो सौ बंडल भी आ गए हैं। इन्हें आपदा कार्यालय में रखवा दिया गया है। आपदा विशेषज्ञ प्राची ने बताया कि लोगों को खाने-पीने के लिए दी जाने वाली राहत किट का टेंडर हो रहा है। वहीं अधिशासी अभियंता शशिकांत ने बताया कि जहां भी कटान का खतरा है वहां युद्धस्तर पर कार्य शुरू हैं।