बाराबंकी। पहले भूली-भटकी लावारिस व पीड़ित महिलाओं को सुरक्षित रखने का ठिकाना नहीं था। लेकिन सखी वन स्टाप सेंटर अब भटकी हुई महिलाओं को न सिर्फ आश्रय दे रहा है बल्कि उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
शहर के जगनेहटा में सखी वन स्टाप सेंटर का भवन बना है। यह सेंटर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार की ओर से पुलिस की निगरानी में संचालित है। पिछले वर्ष जनवरी से दिसंबर 2024 तक जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में भूली-भटकी मिली 18 महिलाओं को सखी वन स्टाप सेंटर में रखा गया। यहां से उन्हें उनके परिवारजन का पता लगाकर उनके सिपुर्द किया गया। दो महिलाओं में एक को लखनऊ दृष्टि संस्थान व दूसरी को शिशु गृह भेजा गया। जनवरी 2025 से अब आठ महिलाओं को उनके अपनों से मिलाने का काम किया गया। इनमें नेपाल, बिहार, बंगाल तक की महिलाएं शामिल हैं।
वन स्टाप सेंटर की प्रभारी उप निरीक्षक माया यादव की देखरेख में लावारिस महिलाओं को सुरक्षा व सम्मान की अनुभूति भी होती है। माया यादव का कहना है कि अन्य प्रांतों से भटक कर आने वाली महिलाओं की बोली-भाषा समझ में न आने के कारण ही उन्हें उनके अपनों तक पहुंचाने में दिक्कत आती है। लेकिन उसी तरह की भाषा बोलने वालों को बुलाकर उन्हें समझने की कोशिश की जाती है।
बाढ़ के दौरान खुद बनाकर खिलाया खाया
डेढ़ साल पहले नगर में जमुरिया नदी की बाढ़ के दौरान जब तबाही मची थी, तब सखी वन स्टाप सेंटर के आसपास भी जल भराव हो गया था। उस दौरान उप निरीक्षक माया यादव ने सखी वन स्टाप सेंटर के नाम को सार्थक करते हुए एक सखी की तरह लावारिस महिलाओं को अपने हाथों से एक हफ्ते तक भोजन बनाकर खिलाया था। उनके इस कार्य की प्रशंसा हर किसी ने की थी।