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रारी नदी की शुरू हुई सफाई, किसानों को मिलेगा लाभ

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बाराबंकी। जिले के तीन ब्लॉकों के करीब 100 गांवों की सीमा से होकर गुजरी रारी नदी की सफाई का काम शुरू हो गया है। बाढ़ खंड द्वारा शुरू किये गए सफाई कार्य का शुभारंभ सांसद उपेंद्र रावत ने किया। इस कार्य में करीब डेढ़ करोड़ का खर्च होने का अनुमान है। लागत बढ़ भी सकती है। पूरी सफाई मशीनों से की जाएगी। खास बात यह है कि 30 साल बाद दोबारा नदी की सफाई होने जा रही है। इससे पहले जिले के कद्दावर नेता रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय बेनी प्रसाद वर्मा ने नदी की सफाई कराई थी।
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छोटी नदियों में गिनी जाने वाली रॉरी नदी हरख ब्लॉक के वैसपुर गांव के पास एक झील से निकली है। इसके बाद यह नदी सिद्धौर व बनीकोडर ब्लॉक के गांवों से होते हुए अयोध्या जिले के मवई बॉर्डर के पास गोमती नदी में समाहित हो जाती है। करीब 50 किमी. लंबी रारी नदी के इर्दगिर्द बसे करीब 100 गांवों के किसानों को जलभराव की समस्या से दो चार होना पड़ता है। बरसात में नदी के उफनाने से आसपास के खेेतों में लगी फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो जाती है।
किसानों के अनुसार, नदी के दोनों किनारों में 200 मीटर तक जलभराव से खेती चौपट हो जाती है। गर्मी में रारी नदी का जलस्तर कम हो जाता है और कहीं-कहीं तो यह नदी नाले में तब्दील हो जाती है। इसे लेकर रारी के आसपास बसे गांवों के किसान पिछले कई साल से नदी की सफाई की मांग कर रहे थे। सांसद ने इसे लेकर शासन में पैरवी की तो मंजूरी मिल गई।
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शासन से सफाई की जिम्मेदारी बाढ़ खंड को दी है। बाढ़ खंड ने प्रथम चरण में 30 किमी. लंबी नदी की सफाई का काम शुरू कर दिया है। सिद्धौर ब्लॉक के अलुवामऊ गांव के पास बने पुल से जेसीबी द्वारा सफाई प्रारम्भ कर दी गई है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता शशिकांत सिंह के अनुसार, पूरी नदी की सफाई में करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। लागत और बढ़ सकती है। फिलहाल 90 लाख रुपये का बजट मंजूर हुआ है।
किसान रारी नदी की सफाई की मांग सालों से कर रहे थे। जिसे लेकर शासन में प्रस्ताव भेजा गया था। मंजूरी मिलने के बाद सफाई का काम शुरू हो गया है। नदी की सफाई करीब 30 साल पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने कराई थी। नदी की सफाई होने के बाद आसपास के हजारों बीघा खेतों में फसल जलमग्न नहीं होगी।
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-उपेंद्र रावत, सांसद
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