बाराबंकी। पंचायत चुनाव के आरक्षण की स्थिति ‘किस करवट ऊंट बैठेगा’ के मुहावरे जैसी हो गई है। दोबारा जारी हुए आरक्षण पर आई आपत्तियों का निस्तारण करने का काम तो पूरा कर लिया गया। मगर, एक तिथि पर अंतिम सूची के प्रकाशन व सुप्रीम फैसले के इंतजार में प्रशासन से लेकर प्रत्याशियों तक की बेचैनी जरूर बढ़ा दी है। प्रशासन बार-बार कसरत को लेकर जहां परेशान है। वहीं बदलते समीकरण को लेकर जिला पंचायत से लेकर प्रधान पद के प्रत्याशियों की धुकधुकी बढ़ी हुई है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पहले 2005 के आधार पर आरक्षण की पहली सूची दो मार्च को जारी की गई थी। इसको लेकर मांगी गई आपत्तियों के निस्तारण के बाद सभी आपत्तियों को खारिज कर अंतिम प्रकाशन किये जाने वाले दिन ही उच्चतम न्यायालय ने आरक्षण प्रक्रिया निरस्त कर दी। अदालत ने 2015 को आधार मानकर आरक्षण करने के आदेश दिए। इसको लेकर प्रशासन को दोबारा आरक्षण सूची तैयार करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी उसके बाद 20 मार्च को दोबारा आरक्षण की सूची जारी की गई।
जिस पर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। इस पर 26 मार्च को सुनवाई होगी। वहीं प्रशासन ने प्रधान से लेकर जिला पंचायत सदस्य पद के आरक्षण को लेकर लिए आईं 1033 आपत्तियों का निस्तारण दो दिन की कसरत के बाद पूरा कर लिया। हालांकि अभी सभी आपत्तियां खारिज ही मानी जा रही है। अब शुक्रवार को अंतिम सूची का प्रकाशन किया जाना है।
मगर, आरक्षण को लेकर अदालत में दायर याचिका पर भी शुक्रवार को सुनवाई होनी है। ऐसे में सभी की निगाहें सुप्रीम फैसले पर टिकी हैं। ऐसे में जहां लाखों खर्च कर चुके प्रत्याशियों को फैसले से समीकरण बदलने का डर सता रहा है। वहीं आरक्षण को लेकर दोबारा कसरत न करनी पड़े इसकी चिंता प्रशासन को सता रही है।