बाराबंकी। नई आरक्षण नीति के तहत ग्राम पंचायतों के किए गए आरक्षण के बाद आपत्तियां दर्ज कराने का दौर शुरू हो गया है। कोई पिछड़ा वर्ग के रैपिड सर्वे का ब्योरा मांग रहा है तो किसी ने गलत तरीके से ग्राम पंचायत का आरक्षण करने पर आपत्ति जताई है। पहले दिन ब्लॉक से लेकर डीपीआरओ कार्यालय तक पांच लोगों ने लिखित और मौखिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं। आठ मार्च तक आने वाली शिकायतों का निस्तारण जिलाधिकारी द्वारा गठित कमेटी करेगी।
जिला प्रशासन द्वारा बीते मंगलवार को 1161 ग्राम पंचायतों की आरक्षण सूची जारी की गई थी। ब्लॉकों पर यह सूची चस्पा होने के बाद आरक्षण में सीट चली जाने पर चुनाव न लड़ पाने के फेर में आपत्तियां आना शुरू हो गई हैं। गुरुवार को डीपीआरओ कार्यालय पहुंचे श्रवण कुमार ने डीपीआरओ रणविजय सिंह के समक्ष कहा कि उन्हें रैपिड सर्वे का ब्योरा चाहिए। आखिर कौन सा फार्मूला लगाकर ग्राम पंचायत गंजरिया की सीट ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हुई है।
डीपीआरओ ने उसे ब्लॉक पर यह ब्योरा मिलने की बात कही। तासीपुर गांव के ग्रामीण भी डीपीआरओ कार्यालय में आपत्ति दर्ज कराने पहुंचे और बताया कि 2015 में बनी नई ग्राम पंचायत तासीपुर अनारक्षित थी। इस बार एससी वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। जबकि गांव में एससी की जनसंख्या तीसरे नंबर पर सबसे कम है। इस पर भी डीपीआरओ ने ब्लॉक पर शिकायती पत्र देने की बात कही।
फतेहपुर ब्लॉक में दुर्गेश कुमार ने शिकायती पत्र देकर बताया कि 2015 में बनी नई ग्राम पंचायत रीवा चपरी सामान्य थी, इस बार एससी वर्ग के लिए आरक्षित हुई है। लेकिन 96 ग्राम पंचायतों में से 22 सीटें ही एससी वर्ग की रखी गई हैं। इस वर्ग का आरक्षण 21 प्रतिशत से अधिक किया गया है। जबकि पिछड़ा वर्ग की 27 प्रतिशत आरक्षण के अनुसार 26 पद ही रखे गए हैं।
सिरौलीगौसपुर ब्लॉक पहुंचे कटका के प्रमोद ने शिकायत दर्ज कराई कि उनकी ग्राम पंचायत एससी वर्ग की क्यों नहीं आरक्षित हुई। जबकि आज तक एससी वर्ग को मौका नहीं मिला। इससे पहले यह सीट अनारक्षित थी। वहीं हसन ने आपत्ति दर्ज कराई कि बीडीसी सैदनपुर द्वितीय वार्ड पांच, छह, सात और आठ की सीट एससी की गई है। जबकि इस वर्ग की आबादी बेहद कम है।