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अस्पताल में वसूली का खेल, मुफ्त प्रसव का सिस्टम फेल

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बाराबंकी। मुफ्त और सुरक्षित प्रसव सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। जिले भर की प्रसूताओं की आखिरी उम्मीद जिला महिला अस्पताल है, मगर वर्तमान समय में यहां व्यवस्था पटरी से उतर गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां इलाज, जांच व प्रसव के नाम पर वसूली होने का मामला गर्माया है। पांच दिन पहले एक प्रसूता की मौत के बाद सीएमएस और कर्मचारियों पर मुकदमा भी दर्ज हो चुका है।
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जिला महिला अस्पताल न केवल गरीब महिलाओं, बल्कि सीएचसी व पीएचसी से रेफर की गईं प्रसूताओं के लिए है। यहां रोजाना 20 से 25 प्रसव होते हैं। महिला अस्पताल की बहुमंजिला इमारत के अंदर हर सुविधा होने का दावा भी किया जा रहा है, मगर कुछ महीनों से यहां जांच से लेकर प्रसव के नाम पर भी पैसे लिए जाते हैं।
प्रसव के लिए तो खुलेआम वसूली होती है। हालात यह हैं कि महिला अस्पताल में निजी चिकित्सालयों के प्रतिनिधि दिनभर सक्रिय रहते हैं। अस्पताल के बाहर निजी एंबुलेंस तक खड़ी रहती हैं। सतरिख थाना क्षेत्र के तमरसेपुर गांव निवासी रिंकू बताते हैं कि जिला महिला अस्पताल में कुछ दिन पहले पत्नी नीता का प्रसव कराया था। इसके लिए जांच से लेकर प्रसव कराने तक में पैसे लिए गए। करीब साढ़े आठ हजार रुपये खर्च हो गए। मजबूरी में अंगूठी तक बेचनी पड़ी। कर्मचारी सीएमएस की भी नहीं सुनते हैं।
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कोई पैसा मांगे तो करें शिकायत
महिला अस्पताल में जांच, इलाज व प्रसव के नाम पर यदि कोई पैसा मांगता है तो तुरंत शिकायत करें। ऐसा पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई वसूली करने में लगा है तो उसे चिह्नित कर कार्रवाई करेंगे।
- पीके श्रीवास्तव, सीएमएस
केस एक
बीती 10 अक्टूबर को जिला महिला अस्पताल में प्रसव के लिए लाई गई सफदरगंज क्षेत्र के बिकौली गांव निवासी ममता की मौत हो गई। महिला के पति के अनुसार इलाज के लिए पांच हजार रुपये मांगे गए। सीएमएस समेत अन्य कर्मचारियों पर केस दर्ज हुआ।
केस दो
शहर के कांशीराम कॉलोनी निवासी प्रदीप कुमार मजदूरी करता है। रविवार को जिला महिला अस्पताल में उसकी पत्नी का प्रसव होना था। पत्नी को लेबर रूम में ले जाने के बाद अंदर से रुपयों की मांग होने लगी। प्रदीप ने थक-हार कर सीएमएस को मोबाइल फोन मिलाया, मगर बंद मिला।
केस तीन
जिला महिला अस्पताल की बदनामी के कारण जहांगीराबाद क्षेत्र के रंजीत यादव शनिवार को अपनी पत्नी अंजू सिंह को महिला अस्पताल की बजाय हैदरगढ़ रोड स्थित सुमन अस्पताल लेकर चले गए थे। यहां प्रसूता की जान चली गई। इसे लेकर हंगामा भी हुआ।
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