बाराबंकी। घर में घुसकर युवती को बंधक बनाकर दुष्कर्म करने के मामले में अभियोजन की अहम गवाह बनी पीड़िता की मां ही अदालत में अपने बयान से मुकर गई। उसने अदालत को बताया कि बच्चों के बीच विवाद हुआ था। जब वह मौके पर पहुंची तो बेटी रोते हुए मिली। इसके बाद वह कोतवाली गई, जहां बैठे एक व्यक्ति ने उससे कहा कि कुलदीप उसके गांव का है और वह उसे जेल भिजवाना चाहता है। महिला के मुताबिक उसी व्यक्ति ने प्रार्थनापत्र लिखकर उस पर अंगूठा लगवा लिया।
मां के साथ ही पिता और पीड़िता के बयानों में भी आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। ऐसे में संदेह का लाभ देते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट इंद्रजीत सिंह ने आरोपी कुलदीप रावत को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया। साथ ही कोर्ट ने मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला के खिलाफ धारा 344 के तहत अलग से कार्रवाई करने का आदेश भी दिया है।
मामला हैदरगढ़ कोतवाली क्षेत्र के एक गांव का है। गांव निवासी महिला ने चार जनवरी 2022 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 30 दिसंबर 2021 को वह पति के साथ खेत गई थी। लौटकर घर पहुंची तो बेटी रोती हुई मिली। उसने बताया कि गांव का ही कुलदीप उसे घर में घसीटकर ले गया और पटकने के बाद उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद दीवार फांदकर भाग गया। अभियोजन ने मामले में पीड़िता, उसकी मां और पिता को गवाह बनाया। सुनवाई के दौरान पीड़िता की मां अपने पूर्व बयान से पलट गई। महिला ने बताया कि अगले दिन थाने पर परिजनों और अन्य लोगों की मौजूदगी में समझौता हो गया था।