बाराबंकी। अयोध्या में रामलला के मंदिर का निर्माण और 22 जनवरी को होने वाली प्राण प्रतिष्ठा ने जिले के उन दर्जनों मंदिरों, मठों और आश्रमों में उल्लास भर दिया है जो सदियों से अयोध्या से ही संचालित किए जा रहे हैं। कई मंदिरों के महंत अयोध्या से ही हैं। खुशी का माहौल ऐसा है कि किसी मंदिर का जीर्णोद्धार तेजी से चल रहा है तो किसी की मरम्मत कर उसे रंगाई-पुताई कर संवारा जा रहा है।
अयोध्या से जुड़े मंदिर और मठ की करोड़ों की जमीनें बाराबंकी में हैं। निंदूरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत बिसई में स्थित नौहई कुटी का संचालन अयोध्या के श्रीरामजानकी ट्रस्ट से होता है। हनुमानगढ़ी के गद्दी आसीन महंत 1008 प्रेमदासजी महराज इस कुटी के भी महंत हैं। कुटी व जमीनों की देखरेख उनके शिष्य राणादास महराज करते हैं। अयोध्या में मंदिर निर्माण के साथ ही यहां भी मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू है। राणादास कहते हैं कि यह जीर्णोद्धार राम की कृपा से हो रहा है। राम ही इसके आधार हैं।
टिकैतनगर के श्रीरामजानकी मंदिर का संचालन अयोध्या की छोटी छावनी से होता है। पुजारी स्वामीदयाल मिश्रा ने बताया कि राम मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा को लेकर मंदिर की रंग-पुताई चल रही है। प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन मंदिर को सजाया जाएगा और रामायण का पाठ होगा। बनीकोडर ब्लॉक की ग्राम पंचायत जरौली में स्थित श्री सागरदास आश्रम के मंगल मूरत हनुमान मंदिर का संबंध अयोध्या के राम गुलेले मंदिर से है। यहां मंदिर निर्माण को लेकर उत्साह है। मंदिर को सजाया जा रहा है। यहां भी प्राण प्रतिष्ठा के दिन सुंदरकांड का पाठ, कीर्तन भजन के साथ विविध कार्यक्रम होंगे।
प्राण प्रतिष्ठा का गवाह बनने को व्यग्र हैं रामभक्त
22 जनवरी को अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का साक्षी बनने के लिए जिले के रामभक्त व्यग्र दिख रहे हैं। हजारों लोगों ने उस दिन अयोध्या में ही बिताने का फैसला लिया है। नरौली गांव के 65 वर्षीय कथावाचक पंडित केशव मिश्रा कहते हैं कि इस दिन का इंतजार पूरी उम्र किया। कोठी के राजेश यादव ने उस दिन के लिए वाहन बुक कर लिया है। अधिवक्ता पंकज तिवारी कहते हैं कि उसे दिन अयोध्या में होना ही बड़ा सौभाग्य है।