बाराबंकी। मौसम में अचानक बदलाव और मंगलवार सुबह हुई बारिश ने किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। खेतों में कटे धान के भीग जाने से किसान खासा परेशान हैं। किसान फसल को सहेजने तथा जल्द से जल्द घर लाने में जुट गए हैं। क्योंकि यदि अब और बारिश हुई तो धान की फसल बर्बाद होने के साथ ही आलू, मटर व सरसों के साथ ही सब्जियों पर भी इसका असर पड़ेगा। वहीं, शाम को शहर, फतेहपुर और देवा क्षेत्र में तेज बारिश होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
सोमवार को पूरे दिन बूंदाबांदी के बाद रात को रिमझिम बारिश हुई। जिले में 1.92 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की फसल बोई गई है। अभी तक करीब 35 प्रतिशत ही धान की फसल तैयार हो पाई है, बाकी खेतों में है या कटी पड़ी है। किसानों का कहना है कि बालियां भीगने से धान काला पड़ जाएगा। इससे फसल पूरी तरह से चौपट हो जाएगी। इसे देखते हुए किसान कटी फसल को जल्द से जल्द घर पहुंचाने की तैयारी में हैं। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज के कृषि वैज्ञानिक डॉ. जेपी सिंह ने बताया कि कटी धान की फसल को तो नुकसान होगा ही फूलों वाली धान की फसल को और ज्यादा नुकसान होगा। कहा, यदि और पानी गिरा तो चना, मटर और मसूर के अलावा लौकी, परवल तथा कद्दू की फसल को भी नुकसान होगा। इसलिए किसान खेतों में पानी न भरने दें।
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हैदरगढ़ में नहीं हुई बारिश
मौसम विभाग के अनुसार नवाबगंज तहसील में 6 मिमी, रामसनेहीघाट में दो मिमी, फतेहपुर में दो मिमी, रामनगर में 6 मिमी और सिरौलीगौसपुर में दो मिमी बारिश हुई। जबकि हैदरगढ़ में बारिश नहीं हुई। जिले में करीब तीन मिमी बारिश रिकार्ड की गई है। उधर, दिन और रात के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान 23.1 डिग्री व न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि आर्द्रता 82 प्रतिशत और हवा की रफ्तार 14 किमी प्रतिघंटे की रही।
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आलू और सरसों की बोआई पर असर
कोटवाधाम। तहसील क्षेत्र में सोमवार रात्रि से रुक-रुक कर हो रही बारिश का किसानों पर बुरा असर पड़ा है। जहां धान की फसल कटकर खेतों में पड़ी है, उसके भीगने से नुकसान हुआ है। वहीं, कई किसानों की मोटे धान की फसल अभी खेत में ही लगी है। जिसके बारिश में गिरने की आशंका है। उधर, बारिश से आलू की बोआई भी प्रभावित हुई है। इसके अलावा जिन किसानों ने सरसों, चना, मसूर की बोआई की है, उन्हें भी नुकसान हुआ है।
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अभी इतनी बारिश नहीं हुई है कि धान की फसल को नुकसान हो। लेकिन यदि अब इससे ज्यादा पानी गिरा तो फसल को नुकसान होगा।
- राजितराम, जिला कृषि अधिकारी