यह खुलासा ई डिस्ट्रिक प्रोग्राम मैनेजर के छापे और छानबीन में हुआ। तीन जनसेवा केन्द्रों पर फर्जीवाडा पकड़ा है। उनके संचालकों की आईडी को बंद कर रिपोर्ट दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है।
आमजन को आय, जाति, निवास आदि प्रमाण पत्र उपलब्ध व अन्य सेवाएं देने के लिए जिले में 308 जनसेवा केंद्र खोले गए। इनका संचालन शुरू होने के साथ कुछ दिनों बाद से गड़बड़ी की शिकायतें आने लगीं।
इसके साथ ही फर्जी प्रमाण पत्र जारी होने के मामले भी सामने आए। कई केंद्रों निर्धारित स्थान की बजाय दूसरी जगहों पर संचालित किए जा रहे हैं।
ऐसी शिकायतों पर दो दिन पूर्व जाटा बरौली में धनीराम द्वारा संचालित जनसेवा केंद्र पर ई डिस्ट्रिक प्रोग्राम मैनेजर ने छापा मारा तो पता चला कि उक्त केंद्र शहर में स्थित त्रिवेणी जनसेवा केंद्र से संचालित हो रहा। संचालक ने अपनी आइडी वहां के संचालक को दे रखी है।
इसके बदले में वह 30 रुपये प्रति प्रमाण पत्र लेता पाया गया। इसी तरह की गड़बड़ी सिरौलीगौसपुर में विशाल सुविधा सेंटर जगदीशपुर, शिवम जनसेवा केंद्र मझगवां फतेहपुर में पकड़ी गई। पता चला कि संचालक फर्जी नामों से आय बनाकर प्रमाण पत्र जारी कर रहे थे।
विभाग द्वारा जारी की गई आईडी का दुरुपयोग किया जा रहा था। जांच में फर्जीवाड़ा उजागर होने पर तीनों संचालकों की आईडी बंद करने के साथ ई डिस्ट्रिक प्रोग्राम मैनेजर ने उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए डीएम से अनुमति मांगी है।
प्रमाण पत्र के लिए डेढ़ सौ की वसूली
आवेदकों की शिकायत के मुताबिक जनसेवा केंद्रों पर प्रमाण पत्र जारी करने के नाम पर 100 से लेकर 150 सौ रुपये तक लिए जाते हैं। जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ है। प्रमाण पत्र का निर्धारित शुल्क बीस रुपये हैं।
इससे ज्यादा पैसा लिया जाना पूरी तरह से गलत है। जन सेवा केंद्र आमजन की सुविधा के लिए खोले गए हैं उनका शोषण करने के लिए नहीं हैं।