रायबरेली। रेलवे कर्मचारियों को कॉलोनियों में आवास न मिलने की समस्या आम हो गई है। जब भी एरिया हाउसिंग कमेटी की बैठक होगी, आवास का मुद्दा जोरशोर से उठाया जाता है। पहले से बने आवास खाली नहीं या फिर जर्जर घोषित कर दिए गए हैं। ऐसे में कर्मचारियों को रेलवे स्टेशनों से दूर किराये के मकानों में रहना पड़ता है। रेलवे यूनियनों की तरफ से लगातार उठाई जा रही मांग को देखते हुए क्षेत्रीय अधिकारियों ने प्रस्ताव तैयार किया है। रायबरेली उप मंडल के अंतर्गत स्टेशनों के आसपास 245 आवास बनाने की मांग की गई है। अब उच्चाधिकारियों की स्वीकृति और बजट का इंतजार किया जा रहा है।
शहर के रेलवे स्टेशन के आसपास मंशा देवी काॅलोनी, टैंक कॉलोनी, मॉडल कॉलोनी आदि बसाई गई है, जिमसें लगभग 250 कर्मचारी रहते हैं। कई आवास काफी पुराने होने के कारण असुरक्षित या जर्जर घोषित कर दिए गए हैं, जिन्हें आवंटित नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा जिले के अन्य रेलवे स्टेशनों पर भी आवासों की संख्या पर्याप्त नहीं है। यही वजह है कि रेलकर्मियों को समस्याओं से जूझना पड़ता है। गैरजिलों से स्थानांतरित होकर आने वाले कर्मचारियों को ज्यादा दिक्कत होती है, जिन्हें आवास आवंटन के इंतजार में कई महीनों तक भटकना पड़ता है।
कर्मचारियों के लिए आवास आवंटित न होने की समस्या लगातार रेलवे यूनियनों उठाती रही हैं, जिसे अब गंभीरता से लिया गया है। रेलवे यूनियनों की ओर से उपलब्ध कराई गई मांग के आधार पर रेलवे के क्षेत्रीय अधिकारियों ने प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजा है। जर्जर आवासों को तोड़ने के साथ ही रेलवे की खाली जमीनों पर 245 नए आवास बनाने की मांग की गई है। वरिष्ठ खंड अभियंता (कार्य) विजय श्रीवास्तव का कहना है कि रेलवे यूनियनों की ओर से लगातार आवास की समस्या उठाई जा रही थी। इसीलिए रायबरेली उप मंडल के सभी स्टेशनों पर 245 नए आवास बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है।