सूरतगंज/कोटवाधाम (बाराबंकी)। सरयू की बाढ़ से प्रभावित लोगों को राहत मिलती नहीं दिख रही है, क्योंकि रामनगर तहसील क्षेत्र के कई गांवों में तेज कटान हो रही है। जमका, खुज्झी और सरसंडा गांव में कटान से दहशत व्याप्त है। यहां अब तक 30 मकान व झोपड़ी नदी में समा चुकी हैं। खुज्झी गांव का प्राथमिक विद्यालय और सरसंडा का पंचायत भवन नदी की धारा में समा रहा है।
बाढ़ से करीब 2500 हेक्टेअर जमीन प्रभावित है। नदी के उस पार बसे जमका गांव का अस्तित्व खतरे में है। एक दर्जन से अधिक मकान नदी में समा चुके हैं। मंगलवार की शाम एक मकान बिल्कुल नदी की कगार पर था। एसडीएम रामनगर अनुराग सिंह ने बताया कि जमका गांव के लोगों को परशुरामपुर गांव में पहले ही शिफ्ट किया जा चुका है। वहीं तटबंध पर बसे लोगों को प्रशासन की ओर से खाना बांटा जा रहा है। नौ नाव संचालित हैं।
सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र में कुछ दिन पहले सरयू नदी में आई बाढ़ से अपना घर छोड़ कर तटबंध और सड़क पर अपना आशियाना बना कर जीवनयापन कर रहे परिवारों के सामने मंगलवार सुबह से हो रही तेज बारिश से मुश्किलें बढ़ गई हैं। पीड़ितों की मड़ैया से पानी टपक रहा है। खाना बनाने वाली लकड़ी भीग गई है। रानीमऊ अलीपुर बांध पर बसे 12 परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इन्हें तिरपाल व पन्नी तक नहीं मिला है। नदी सनावा गांव के पास कटान कर रही है। जिलाधिकारी अविनाश सिंह का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बरसात के कारण जो मुश्किलें पैदा हुई हैं, उनके निस्तारण के लिए अधिकारी और कर्मचारी संवेदनशीलता से काम करें। लोगों का समुचित तरीके से इलाज किया जाए।