देवा/फतेहपुर। इस वर्ष आलू के रिकॉर्ड उत्पादन और निर्यात बाधित होने से जिले के किसान परेशान हैं। उन्हें अपनी उपज की लागत का आधा मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। मजबूरन किसान अपना अधिकांश आलू कोल्ड स्टोरेज में भंडारण कर रहे हैं। भंडारण में भी लाइन लगानी पड़ रही है।
जिले के देवा और फतेहपुर क्षेत्र को आलू के बेल्ट के रूप में जाना जाता है। इस बार जनपद में 25,000 हेक्टेयर में आलू की बोवाई हुई, जिससे 8 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हुआ। उद्यान विभाग के अनुसार, 70 फीसदी आलू 77 कोल्ड स्टोरेज में भंडारित हो चुका है। वर्तमान में आलू का भाव किसानों को 450 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा है।
आलू व्यापारी बताते हैं कि बीते वर्ष हुए भारी नुकसान के कारण इस बार वे खरीद में सावधानी बरत रहे हैं। इजरायल-ईरान युद्ध के चलते निर्यात बाधित है, जिससे देश की मंडियों में आलू की आवक बढ़ी है। पूरे देश में आलू का बंपर उत्पादन हुआ है। किसान अब सरकार से हस्तक्षेप और प्रभावी निर्यात नीति लागू करने की उम्मीद कर रहे हैं।
किसानों पर आर्थिक बोझ
देवा क्षेत्र के किसान राहुल वर्मा के अनुसार, एक बीघे में 16000 रुपये से अधिक की लागत आती है। वर्तमान भाव से किसानों की लागत की रकम आधी हो गई है। फतेहपुर में भी एक बीघे में 14 से 15 हजार रुपये का खर्च आता है। किसान मिथलेश कुमार ने 25 बीघे में साढ़े तीन लाख रुपये लगाए, पर लागत निकालना मुश्किल है।
भंडारण और खरीदार की समस्या
देवा के किसान अनूप बताते हैं कि आलू खोदकर खेतों में पड़ा है, पर कोई व्यापारी खरीदने नहीं आ रहा। किसान सुशील कुमार को आलू बेचकर मांगलिक कार्यक्रम निपटाना था, लेकिन नुकसान देखकर हिम्मत हार गए। फतेहपुर के किसान सिद्धनाथ ने 50 बीघे में खेती की है, जिसमें से 20 बीघे का आलू कोल्ड स्टोरेज में रखा है। खरीदार न मिलने से किसानों को आलू कम दामों में बेचना पड़ रहा है या भंडारण करना पड़ रहा है।