बाराबंकी। खुद को शासन का विशेष सचिव बताकर रौब झाड़ने वाले लखनऊ के सूर्य प्रकाश सैनी ने बाराबंकी में एक जिम संचालक समेत चार लोगों से 48 लाख 60 हजार रुपये ठग लिए। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर शनिवार शाम शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। सैनी लखनऊ में पहले भी फर्जीवाड़े में गिरफ्तार हो चुका है।
आवास विकास कॉलोनी निवासी उत्कर्ष वर्मा ने अदालत में दी अर्जी में बताया कि करीब दो वर्ष पूर्व एक शादी समारोह में उनकी मुलाकात सूर्य प्रकाश सैनी से हुई थी। सैनी ने खुद को वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी बताते हुए लखनऊ सचिवालय में विशेष सचिव पद पर तैनात होने का दावा किया।
वह जिस कार से आता-जाता था, उस पर ‘उत्तर प्रदेश शासन’ अंकित था और वाहन पर सरकारी प्रतीक भी लगे थे। इसी प्रभाव में आकर उत्कर्ष वर्मा और उनके साथियों विकास सिंह, कीर्ति चौधरी और सिंधु सिंह ने उस पर भरोसा कर लिया।
उत्कर्ष के मुताबिक आरोपी ने विकास भवन रोड बाराबंकी में 5000 वर्गफीट का प्लॉट होने का दावा किया और 4500 वर्गफीट का हाॅल बनाकर देने का झांसा दिया। सौदे की बातचीत के लिए वह पीड़ितों को अपनी कार से सचिवालय ले गया, जहां कैंटीन में बैठकर पूरा सौदा तय हुआ।
आरोप है कि 20 लाख रुपये ऑनलाइन और 28 लाख 60 हजार रुपये नकद दिए गए। आरोपी ने आश्वासन दिया कि रजिस्ट्री तीनों के नाम होगी। लेकिन समय बीतता गया, न निर्माण शुरू हुआ, न रजिस्ट्री हुई। जब दबाव बढ़ा तो आरोपी ने फोन उठाना बंद कर दिया और मीटिंग में होने का बहाना बनाने लगा। एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और पूरे प्रकरण की गहन जांच की जा रही है।
लखनऊ में भी लोगों को ठगा, हुआ था गिरफ्तार
मार्च 2025 में भी आरोपी का नाम लखनऊ में आवास दिलाने के नाम पर ठगी में सामने आया था। बंदरियाबाग निवासी राजाराम की पत्नी सुमन ने गौतमपल्ली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि आरोपी ने सुमन सहित रीता देवी, राजेश तिवारी, कालिका सिंह, जानकी और नसरीन से तीन लाख 80 हजार रुपये आवास दिलाने के नाम पर लिए थे। इसमें वह गिरफ्तार किया गया था।
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जांच के घेरे में ‘सरकारी रुतबा’
बाराबंकी में दर्ज नए मामले के बाद पुलिस अब इस एंगल पर भी पड़ताल कर रही है कि आरोपी ने ‘उत्तर प्रदेश शासन’ लिखी गाड़ी और सचिवालय में प्रवेश का जुगाड़ कैसे किया। क्या यह केवल फर्जी प्रतीक और रुतबे का खेल था या कहीं भीतर से मदद मिल रही थी। यह जांच का अहम बिंदु है।