बाराबंकी। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास का पैसा गबन करने के मामले की जांच में फतेहपुर पुलिस द्वारा चार्जसीट भी लगा दी गई है। इसके बाद अब चार अधिकारियों में मुकदमा चलेगा। इसकी अनुमति भी संबंधित अधिकारियों से ले ली गई है। मामला रामनगर ब्लॉक के शेखपुर अलीपुर गांव का है।
यहां पीएम आवास घोटाले में तीन एडीओ पंचायत सहित पांच कर्मचारी जांच में आरोपी पाए गए थे। जिसमें तत्कालीन सहायक निदेशक मत्स्य बीएस चौरसिया की जांच में पीएम आवास का घोटाला सामने आया था।
इसमें सेवानिवृत्त एडीओ पंचायत श्याम कृष्ण, रामनगर ब्लॉक के तत्कालीन एडीओ पंचायत प्रभारी अखिलेश दुबे, पूरेडलई ब्लॉक के तत्कालीन एडीओ पंचायत राघवेंद्र प्रताप, रामनगर आरईडी के एई चेतराम और सचिव अमरेंद्र सिंह दोषी मिले थे। इसकी एफआईआर बीते नौ फरवरी 2021 को कोतवाली फतेहपुर में दर्ज की हुई थी। पुलिस ने विवेचना पूरी कर चार्जसीट लगा दी है।
मामले में चार अधिकारियों के खिलाफ अभियोजना को अभिलेख भेज दिए गए हैं। डीपीआरओ रणविजय सिंह और डीडीओ भूषण कुमार ने इन पर मुकदमा चलाने की अनुमति दी है। खास बात यह है कि आरोपियों में शामिल अवर अभियंता को दोषी नहीं बनाया गया है। डीडीओ भूषण कुमार ने बताया कि इस मामले में सभी आरोपितों पर केस चलाने की अनुमति दे दी गई है।
तत्कालीन डीडीओ ने बीडीओ को बचाया
रामनगर ब्लॉक के शेखपुर अलीपुर ग्राम पंचायत में वर्ष 2016 से लेकर 2018 तक अपात्रों को आवास देकर लाभ दिया गया था। यहां पुराने मकान में प्लॉस्टर कराकर धन निकाल लिया गया था। कुछ के पहचान पत्र बदलकर पैसों का गबन किया गया था। वहीं पीएम आवास का भुगतान तत्कालीन बीडीओ कमलेश कुमार के डिजिटल हस्ताक्षर से हुआ था। तत्कालीन डीडीओ और सहायक अभियंता की दो सदस्यीय टीम ने जांच के दौरान बीडीओ को बचा लिया था।