गजल के मुरीदों के लिए इससे बेहतर मौका शायद कोई नहीं था। अपने तरन्नुम व गजल गायिकी में माहिर पद्मश्री पीनाज मसानी के फन व सुरों को सुनने के लिए इस कदर मजमा लगा कि आडिटोरियम में जगह न मिलने पर लोग खड़े-खड़े ही गजल सुनते रहे। मसानी ने मंच संभाला तो फिर तालियों की गडग़ड़ाहट और वाह वाह का दौर देर तक चलता रहा।
देवा महोत्सव के ऑडिटोरियम में गुरुवार शाम आयोजित गजल संध्या में प्रख्यात गजल गायिका पद्मश्री पीनाज मसानी ने शुरुआत- बेखुद किए जाते हैं अंदाज ये मस्ताने... गजल सुनाकर की। उनके तरन्नुम से इस गजल को खूब दाद मिली। इसके बाद दिल के आईने में तेरी चमक बाकी है, मेरी सांसों में तेरी महक बाकी है... ने खूब तारीफ बटोरी। गजल गाते पीनाज मसानी ने बीच बीच में शायरी भी सुनाई।
वहीं सुरों की बेहतरीन जुगलबंदी से वह मजमे पर छा गई। इसी क्रम में गजल गायिका ने यह गजल फूल रातों में खिलने लगे, चांदनी का मजा आ गया..पेशकर कार्यक्रम में धूम मचा दिया। एक से बढ़कर एक गजल सुन श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। इसी तरह उनकी गजल- मोहब्बत है क्या चीज मुझसे न पूछो, मैं पूछूंगी तुमसे अल्लाह कहां है.., ये न थी हमारी किस्मत कि मिसाल यार होता, अगर और जीते रहते यही इंतजार होता.. पर ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा।