बाराबंकी। पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआई) की जिले में बहुत गहरी जड़ें हैं। बीते 13 साल से पीएफआई जिले में सक्रिय हैं। यहां के तार केरल के मंजूरी स्थित संगठन के ट्रेनिंग स्थल से जुड़े पाए जा चुके है। पिछले साल कुर्सी थानाक्षेत्र के गौराहार गांव से पीएफआई के कोषाध्यक्ष नदीम व सदस्य कमरुद्दीन को दबोचा गया था। प्रतिबंध के बाद पीएफआई डिजिटल नेटवर्क के बूते पर काम कर रहा है। गौराहार में बुधवार भोर एनआईए द्वारा एक सदस्य को दबोचना इसकी पुष्टि करता है।
वर्ष 2010 में संगठन द्वारा सफदरगंज थाने के रामपुर कटरा गांव में भड़काऊ पोस्टर चस्पा किए गए थे। तब 10 लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद पीएफआई ने सुनियोजित तरीके से जिले में अपनी जड़ें मजबूत कीं। रामनगर क्षेत्र की तराई के गावों के साथ ही लखनऊ सीमा से जुड़े गांवों में पीएफआई धर्म और जाति को लेकर लोगों में जहर भरता रहा। कुर्सी थाना क्षेत्र के गौराहार गांव का नदीम छह साल पहले पीएफआई से जुड़ा और उसे संगठन में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। 2019 में लखनऊ की सीएए हिंसा में संलिप्तता पाए जाने पर नदीम व रामनगर थानाक्षेत्र के इब्राहिमपुर गांव निवासी रउफ को गिरफ्तार किया गया था।
सितंबर 2022 में नदीम और बहराइच के कमरुद्दीन की गिरफ्तारी भी गौराहार गांव से हुई। पूछताछ में पता चला था कि दोनों ने केरल के मंजूरी स्थित पीएफआई के मुख्य ट्रेनिंग सेंटर में ट्रेनिंग ली थी और वे नए लोगों को ट्रेनिंग दे रहे थे। नदीम के पास मिले एक रजिस्टर में बम बनाने का शॉर्ट टर्म कोर्स पाया गया था। सूत्र बताते हैं कि नदीम और कमरुद्दीन के जेल जाने के बाद अब उसके साथी गौराहार से नेटवर्क चला रहे थे।
तो गुपचुप चल रहा हिंद ए गजवा ऑपरेशन!
सितंबर 2022 में कुर्सी थाना क्षेत्र के गौराहार गांव से गिरफ्तार किए गए नदीम व बहराइच के कमरुद्दीन उर्फ बबलू ने खुलासा किया था कि पीएफआई को इस्लामिक देशों से फंडिंग हो रही है। 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के लिए हिंद ए गजवा नामक गोपनीय ऑपरेशन भी चलाया जा रहा था। फंडिंग व चंदे में मिलने वाली धनराशि को नदीम और कमरुद्दीन पीएफआई के स्टेट हेड वसीम को सौंपते थे। सितंबर 2022 में संगठन पर प्रतिबंध लगने के बाद से हिंद ए गजवा ऑपरेशन का क्या हुआ, यह गंभीर जांच का विषय है। कहीं यह ऑपरेशन गुपचुप तरीके से चल तो नहीं रहा।