देवी मंदिरों में जयकारे व रात्रि जागरण से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। नाद के साथ शांति का संदेश देने वाली माता चंद्रघंटा सभी तरह से दुष्ट, दैत्याें से रक्षा करने वाली व अज्ञानता का अंधकार दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाली हैं।
माता की महिमा का बखान करते भक्तिगीताें के बीच मंदिराें पर पहुंच रहे भक्त पूजा पाठ में लीन रहे। मंदिर आने जाने वाले मार्गों पर भोर पहर से ही चहल पहल शुरू हो जाती है। मंगलवार को भक्तों ने तृतीय स्वरूप चंद्रघंटा की आराधना कर ज्ञान व साहस प्रदान करने की कामना की।
माता दुर्गा धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष चतुर्विध पुरुषार्थों की प्रदाता हैं। मंदिराें में महिलाओं की ओर से ढोल मंजीरा की धुन के बीच देवी गीत से मां की महिमा का बखान किया गया।
अंबे है मेरी मां जगदंबे है मेरी मां... चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है... जैसे भक्तिगीतों से शनिवार को वातावरण भक्तिमय हो गया। घंटे घड़ियाल व जयकाराें की गूंज के बीच माता के तृतीय रूप की स्तुति की गई। घंटाघर के निकट स्थित बड़ी देवी मंदिर में शाम को भक्ताें ने माता की आरती उतारी।
माता के कुछ भक्तों ने पाठ भी किया। मंगलवार को विभिन्न मंदिरों में माता के तृतीय रूप की पूजा की गई। ग्रामीण इलाकाें में भी देवी पूजा की धूम मची हुई है। शहर में भोर होते ही मंदिराें से बजने वाले घंटा और घड़ियाल के साथ माता के गुणगान करते भक्तिगीताें ने वातावरण भक्तिमय कर दिया।
शहर में कई स्थानों पर रात्रि जागरण की तैयारियों में भक्त जुटे रहे। प्राचीन देवी मंदिर समिति के प्रबंधक इंदु प्रकाश निगम ने बताया कि गल्ला मंडी स्थित श्री अन्नपूर्णा माता मंदिर से 5 अक्टूबर को शाम 7 बजे माताजी की ज्योति चलकर मुख्य मार्ग होते हुए धनोखर चौराहा, घंटाघर, दर्पण टाकिज वाली गली से होकर श्री बड़ी देवी माता मंदिर पहुंचेगी।
सिद्धौर स्थित मां दुर्गा मंदिर बीबीपुर में मंगलवार को भक्तोें की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर में अष्टमी व नवमी को हवन कराने व आरती में शामिल होने के लिए दूर दराज से भी श्रद्धालु आते हैं।
लेकिन मंगलवार को भक्तों की खासी भीड़ रही। रामनगर, फतेहपुर, रामसनेहीघाट, हैदरगढ़, सिरौलीगौसपुर मेें भी माता के मंदिरों में भक्त जुटे। भक्तों ने मां के तृतीय स्वरूप की पूजा अर्चना कर आशीष मांगा।