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डॉक्टरों की लापरवाही मरीजों पर भारी

Wed, 22 Jul 2015 10:59 PM IST
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
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सरकारी और निजी चिकित्सालयों में आए दिन मारपीट व तोड़फोड़ की घटनाएं आम होती जा रही हैं। बावजूद इसके चिकित्सकों की कार्यशैली में बदलाव नहीं दिख रहा है। यही वजह है कि मरीजों और उनके तीमारदारों को दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों से सुविधा शुल्क लिए बिना उपचार न किए जाने की शिकायत आम हो चुकी है। जिला महिला अस्पताल में कुछ दिन पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने निरीक्षण के दौरान पाया था कि मरीजों से पैसा लेकर उनकी जांच पड़ताल की जाती है और यहां तक दवाएं भी बाहर से लिखी जाती हैं। प्रसव पीड़िताओं से इलाज के नाम पर पैसे की मांग होती है। वरना उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। अस्पताल के बाहर पहले से ही दलाल सेट होते हैं, जो मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी क्लीनिक पहुंचा देते हैं। जिला अस्पताल की इमरजेंसी भी इससे अछूती नहीं है। यहां पर वसूली और इलाज में लापरवाही पर अधिवक्ता धरना तक दे चुके हैं। सीएमओ के निरीक्षण में खामियां भी मिल चुकी है। पर चिकित्सक सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं।
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मामला रफा-दफा करा दिया जाता
अभी कुछ दिन पूर्व स्टेडियम के सामने संचालित एक निजी क्लीनिक पर एक महिला पैर फैक्चर होने के बाद उपचार के लिए आई थी। यहां पर इलाज के दौरान चिकित्सकों ने बारह हजार रुपये की मांग की। यह रकम देने से इंकार किया तो महिला के पति को बंधक बना लिया और महिला को भी अस्पताल के बाहर निकाल दिया। खूब हंगामा हुआ मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले को रफा दफा कराया।

सीएमओ डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर उपचार मिले, इसके सख्त निर्देश दिए गए हैं, लेकिन इसका अनुपालन नहीं हो रहा है। जिला महिला और पुरूष अस्पताल में सही से इलाज न मिलने सुविधा शुल्क मांगने की शिकायतें आएदिन मिलती रहती है। इस पर अंकुश लगाने को दोनों अस्पतालों के सीएमएस को निर्देश भी दिए जा चुके हैं।
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आईएमए के महामंत्री डॉ. रोहित अग्रवाल ने बताया कि निजी चिकित्सालयों में मरीज और उनके तीमारदार अक्सर बेवजह विवाद करते रहते हैं। यहां तक क्लीनिक के अंदर ही तोड़फोड़ की जाती है, जिससे अस्पताल प्रशासन को खासा नुकसान उठाना पड़ता है। फिर भी आईएमए के पदाधिकारी कार्रवाई कराने के बजाए पुलिस से सहयोग लेने में ज्यादा विश्वास रखते हैं।

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