बाराबंकी। याददाश्त खो देने के कारण बीते पांच साल से रफी अहमद किदवई जिला अस्पताल में पांच वर्ष से गुमनामी में रह रहीं पार्वती को शुक्रवार को बिछड़ा हुआ परिवार मिला। महोबा जिले की तहसील कुल्पाहर के ग्राम छितरवारा से पार्वती के पति विजय, पुत्री उपमा व बहन किरन उसे घर जा जाने के लिए जब जिला अस्पताल पहुंचे तो पूरा माहौल भावुक हो उठा। अपनों से मिलकर पार्वती की आंखें भी भर आईं। वह पुत्री व बड़ी बहन को गले से लगा कर फफक पड़ी।
शुक्रवार को सुबह से ही पार्वती को उपहार देकर विदाई देने वालों का तांता अस्पताल परिसर में जुटने लगा था। बीते पांच सालों से एक परिवार सदस्य की तरह पार्वती की देखभाल करने वाली अस्पताल कर्मी रोमी सैनी, किरन, सुमन व आशा कनौजिया समेत अन्य महिलाओं ने विदाई में उसे साड़ी, चूड़ी, पर्स, मिठाई आदि भेंटकर सुखी पारिवारिक जीवन की कामना। पार्वती ने सबके साथ फोटो खिंचवाए और अपनी पुत्री, बहन व पति विजय से मिलवाया। सबके मोबाइल नंबर भी पुत्री के मोबाइल नंबर में फीड़ कराए। महिला चिकित्साकर्मियों के साथ ही पुरुष चिकित्सा कर्मियों के परिवार की महिलाएं व बच्चे भी पार्वती से मिलने पहुंचे। सीएमएस डॉ.वीपी सिंह ने बताया कि पार्वती परिवारीजन को पाकर खुश है।
पांच साल पहले घायल अवस्था में मिली थी पार्वती
14 अक्टूबर 2019 को शाम पांच बजे नगर के मुहल्ला सत्यप्रेमी नगर में रामाश्रम के निकट जख्मी हालत में पार्वती को देखकर सभासद पंकज मिश्रा ने पुलिस को फोन कर इसकी सूचना दी थी। उसके शरीर पर कई जगह चोट के निशान थे। पुलिस के अनुसार वह ट्रेन से गिर कर घायल हुई थी। इसके बाद किसी तरह रेलवे लाइन किनारे से उठकर रामाश्रम तक पहुंची। चोट के कारण वह अपनी याददाश्त भी खो चुकी थी।
ऐसे लगा परिवार का पता
अमर उजाला ने एक मार्च 2025 को पार्वती की खबर प्रमुखता के साथ दी थी। इसका संज्ञान लेकर डीएम शशांक त्रिपाठी ने पार्वती के परिवारजन का पता लगाने के लिए तहसील नवाबगंज के एसडीएम न्यायिक विवेकशील व एडीएसअीओ प्रतिभा यादव को जिम्मेदारी सौंपी। पार्वती की भाषा महोबा जिले जैसी होने से महोबा जिले के अधिकारियों से भी संपर्क किया।
जिले की तहसील कुल्पाहार में छितवारा नामक गांव हैं। एसडीएम विवेकशील ने कुल्पाहार तहसील में तैनात रह चुके मौजूदा समय फिरोजाबाद के तहसीलदार कृषराज से संपर्क किया तो उन्होंने छितवारा गांव के लेखपाल राम कुमार के जरिए पार्वती के पति विजय व जेठ संजय पटेरिया से बात कराई। वीडियो कॉल कराने पर परिवारीजनों ने पार्वती को पहचान लिया।