बाराबंकी। माह-ए-रमजान के दौरान सारा दिन भूखे-प्यासे रहकर रोजेदार खुदा की इबादत करते हैं। इसके बाद शाम को इफ्तारी के दौरान दस्तरख्वान रसीले फल, अंगूर, तरबूज, खजूर, शर्बत, पकौड़ी सहित अन्य व्यंजनों से सजता है। मौसम में बदलाव के साथ दिन का पारा चढ़ने के कारण इफ्तारी में खास तौर पर रसीले फलों की मांग बढ़ी है।
अलसुबह से लेकर देरशाम तक भूखे और प्यासे रहने वाले रोजेदारों की पहली पसंद खजूर है। इसके बाद मौसमी फल सेव, केला, पपीता, अंगूर के अलावा तरबूज को इफ्तारी के दौरान खासा पसंद किया जा रहा है। इफ्तारी के लिए अब तरबूज की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है। तरबूज से लोग भूख के साथ प्यास भी बुझा रहे हैं। फुटकर विक्रेता सुहैल ने बताया कि पट्टी वाला तरबूज 30 रुपये और काला तरबूज 20 रुपये किलो के भाव से विक रहा है। खजूर से रोजा इफ्तार सुन्नत
रमजान में इफ्तार के समय खजूर खाना सुन्नत माना जाता है। चिकित्सकों के अनुसार खजूर में फाइबर, आयरन, पोटेशियम, मैग्नीशियम, विटामिन बी और एंटी ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसीलिए रोजा इफ्तारी के समय दस्तरख्वान पर खजूर का होना जरूर माना जाता है।
बाजार मेंं खजूर की कीमत 150 रुपये से लेकर 2500 रुपये प्रति किलो तक है। इसी तरह रमजान के दिनों में सूतफेनी, लच्छा व सिंवई का महत्व भी काफी बढ़ जाता है। इसे इफ्तारी व सहरी दोनों में इस्तेमाल किया जाता है। दुकानदार इम्तियाज ने बताया कि लच्छा व सूतफेनी 160 रुपये किलो और सिंवई 80 रुपये किलोे की दर से बिक रही है।