बाराबंकी। विवाहिता के फंदे से लटक कर जान देने के मामले में अदालत में मृतका के माता-पिता के अपने पूर्व बयानों से मुकर जाने पर कोर्ट ने आरोपी पति अंकुल, सास मंजू देवी व ससुर धर्मानंद को बरी कर बड़ी राहत प्रदान की है। मेडिकल रिपोर्ट में भी मृतका के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले थे।
रामनगर कोतवाली के इब्राहिमपुर गांव निवासी नान्हे ने 29 सितंबर 2022 को पुलिस को तहरीर देकर बताया कि उन्होंने अपनी पुत्री सुग्गी का विवाह करीब छह माह पहले राजेपुर गांव निवासी अंकुल उर्फ अंकुर के साथ किया था। आरोप था कि ससुराल में पति अंकुल, सास मंजू देवी, ससुर धर्मानंद और चचेरे ससुर कन्हैया लाल बाइक की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करते थे। प्रताड़ना से परेशान होकर वह बेटी को मायके ले आए थे और 26 सितंबर को दोबारा ससुराल भेजा था। 29 सितंबर को सास ने गाली-गलौज की थी, जिससे आहत होकर विवाहिता ने फंदे से लटक कर जान दे दी थी।
इस मामले में विवाहिता के परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना के दौरान कन्हैया लाल का नाम हटा दिया गया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान मृतका के पिता नान्हे ने अपने बयान में कहा कि बेटी से दहेज की मांग नहीं की गई थी। वह पहले भी तीन-चार बार आत्महत्या का प्रयास कर चुकी थी। उन्होंने यह भी कहा कि बेटी का मानसिक संतुलन ठीक नहीं था। वह लोगों के कहने पर थाने में तहरीर देने चले गए थे।
मृतका की मां ननकई ने भी इसी तरह का बयान कोर्ट के समक्ष दर्ज कराया। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश विनय कुमार सिंह ने पति, सास और ससुर को दोषमुक्त करार करते हुए बरी करने का आदेश दिया।