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एससी वर्ग का व्यक्ति बनेगा सबसे बड़ी पंचायत का मुुखिया

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बाराबंकी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष के पद का आरक्षण शासन स्तर से जारी होने के बाद साफ हो गया कि सबसे बड़ी पंचायत के मुखिया के पद पर एससी वर्ग का व्यक्ति आसीन होगा। 25 साल पहले सन् 1995 में त्रिस्तरीय पंचायत एक्ट लागू होने के बाद एससी वर्ग के लिए अध्यक्ष की कुर्सी आरक्षित हुई थी। इसके बाद से पिछड़े वर्ग, महिला या अनारक्षित श्रेणी में ही रही है।
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इस बार भी जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हथियाने के लिए कई दिग्गज चुनावी गणित फिट करने के साथ ही राजनीतिक ताना बाना बुन रहे थे। किंतु आरक्षण जारी होने के बाद कई प्रबल दावेदारों के मंसूबों पर पानी फिर गया। जिलास्तर पर सबसे महत्वपूर्ण और ताकतवर पद जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हथियाने के लिए प्रमुख राजनीतिक दलों में होड़ रहती है।
विकास के सबसे अधिक बजट वाली इस पंचायत की कुुर्सी पर आरक्षण को लेकर संशय के बादल शुक्रवार को छट गए। शासन ने अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित किया है। इससे पहले 1995 में आरक्षित होने पर रामगोपाल रावत जिला पंचायत अध्यक्ष रहे हैं।
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कौन कब तक रहा कुर्सी पर
महंत जगन्नाथ बख्श दास 1952 से 1975 तक, जिलाधिकारी (प्रशासक) 1975 से 1989 तक, देवनारायण सिंह 1989 से 1995 तक, रामगोपाल रावत 1995 से 2000 तक, कुसुम सिंह 2000 से 2006 तक, शीला सिंह 2006 से 2016 तक, अशोक सिंह 2016 से अब तक जिला पंचायत अध्यक्ष रहे।
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