बाराबंकी। बेमौसम बारिश से किसानों की कमर टूट गई है। खेतों में धान की फसल सड़ रही है। जहां कम पानी है, वहां धान का अंकुरण होने की संभावना पैदा हो गई है। उड़द व अरहर की फसल को भी भारी नुकसान हुआ है। इससे करीब चार लाख किसान परेशान हैं।
जिले में धान की खेती प्रमुखता से होती है। कृषि विभाग ने एक लाख 76 हजार हेक्टेयर में धान की बोआई का लक्ष्य रखा था। माना जा रहा है कि करीब एक लाख 80 हजार हेक्टेयर में धान की खेती हुई है। करीब चार लाख किसान जिले में धान की खेती करते हैं।
इस बार जुलाई व अगस्त में अच्छी बारिश न होने से किसानों ने निजी साधनों व नहर के भरोसे धान की रोपाई की थी। अक्टूबर में धान की कटाई शुरू हो जाती है, लेकिन जब कटाई का समय आया तो बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। पिछले चार दिन से बारिश से खेतों में गिरी धान की फसल सड़ने लगी है। किसानों की मानें तो पानी भरे खेतों से धान काटना मुश्किल है।
एक बीघे में आई चार हजार की लागत
धान की नर्सरी तैयार करने, खेतों की जुताई, रोपाई, खाद, कीटनाशक, सिंचाई में इस बार प्रति कच्चा बीघा करीब चार हजार रुपये की लागत आई है। बनीकोडर के किसान राकेश चंद्र बताते हैं कि इस बार चार बार सिंचाई करनी पड़ी।
11 के बाद शुरू होगा नुकसान का सर्वे
जिला कृषि अधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि अभी 11 अक्टूबर तक बारिश होने की संभावना है। इसके बाद कृषि, राजस्व व बीमा कंपनियों के अधिकारियों की संयुक्त टीम की ओर से नुकसान का सर्वे किया जाएगा।
फसलों का रकबा (हेक्टेयर में)
धान- 1.80 लाख
मक्का- 4234
उड़द- 12898
अरहर- 2081