बाराबंकी। जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल पीजी कॉलेज में शनिवार को समाजशास्त्र विषय के प्री-पीएचडी पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के लिए शोध पत्र लेखन पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या के समाजशास्त्र विभाग के संयोजक एवं प्राचार्य प्रो. सीताराम सिंह ने शोध लेखन की प्रक्रिया और तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि एक अच्छा शोधकर्ता वही है, जो अपने विचारों को स्पष्ट ढंग से लिख सके और पाठक तक सही संदेश पहुंचा सके। शोध कार्य में मौलिकता, धैर्य और अनुशासन ही सफलता की कुंजी है। इस मौके पर छात्र-छात्राओं ने अपने-अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इनमें अश्विनी सिंह, लवी सिंह, स्तुति पाडेय, रिया सिंह, किर्ति यादव, सूरज कुमार मिश्रा, सदफ परवीन, श्वेता मिश्रा और मैरी विन्दर कौर शामिल रहीं।
प्रत्येक शोध पत्र पर प्रश्नोत्तर का दौर भी चला। छात्रों ने प्रमुख तौर पर पूछा कि शोध लेखन में मौलिकता और संदर्भ सूची का संतुलन कैसे बनाया जाए, प्रतिवेदन लेखन में किन बिंदुओं को विशेष महत्व दिया जाना चाहिए और शोध पत्र व शोध आलेख में मुख्य अंतर क्या है। इन प्रश्नों का उत्तर प्रो. सिंह ने सरल और तार्किक उदाहरणों के साथ दिया। कहा कि बचपन में जो आदतें जिज्ञासा, प्रश्न पूछने और खोज करने की प्रवृत्ति हमारे भीतर विकसित होती हैं, वही शोध लेखन में सबसे बड़ी ताकत बनती हैं।