बाराबंकी। कोतवाली देवा और मसौली थाने से जुड़े दो पुराने मामलों में अदालत ने जमानतदारों के खिलाफ जारी वसूली आदेशों को समाप्त करने का आदेश दिया है। दोनों मामलों में पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जमानतदार या तो अब जीवित नहीं हैं या लंबे समय से उस पते पर नहीं रहते।
पहला मामला कोतवाली देवा का है। वर्ष-1994 में दर्ज जानलेवा हमले के आरोपी गनी खां के फरार हो जाने और न्यायालय में पेश न होने पर उसके जमानतदार रामसनेहीघाट के मोहम्मदपुर गांव निवासी सुरेश के विरुद्ध जमानत राशि की वसूली के आदेश जारी हुए थे। पुलिस ने जांच में रिपोर्ट दी कि मोहम्मदपुर गांव में इस नाम का कोई व्यक्ति न तो पहले रहता था और न ही अब मौजूद है। इस पर अपर सत्र न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह ने सुरेश के विरुद्ध जारी वसूली आदेश समाप्त करने का निर्देश दिया।
इसी प्रकार मसौली थाने में वर्ष-2008 में दर्ज एक अन्य मामले में अभियुक्त प्रवीन कुमार राना के न्यायालय में उपस्थित न होने पर उसके दो जमानतदारों रामसनेहीघाट के नारायणपुर निवासी संतराम और धरौली के अशोक कुमार के विरुद्ध वसूली आदेश जारी किए गए थे। अदालत को दी गई रिपोर्ट में बताया गया कि संतराम की मौत 11 वर्ष पहले हो चुकी है, जबकि अशोक कुमार के भी निधन का प्रमाण मिल चुका है।