त्रिवेदीगंज क्षेत्र के मुबारकपुर गांव निवासी रामकृपाल और अनारकली के दो पुत्रों बड़ा बेटा प्रशांत (16) हर साल दोस्तों के साथ आठ किमी पैदल चलकर महादेव के दर्शन करता था। प्रशांत दसवीं कक्षा का छात्र था। पिता रामकृपाल खेती करते हैं और ट्यूशन पढ़ाकर बेटे को पढ़ा रहे थे। वह चाहते थे कि बेटा अफसर बने। सोमवार सुबह प्रशांत के दोस्त रुद्रप्रताप ने हादसे की खबर दी तो रामकृपाल भागे-भागे अस्पताल पहुंचे, लेकिन बेटे को मृत पाया। पोस्टमार्टम के बाद शाम को शव गांव पहुंचा तो मां अनारकली की दहाड़ें सुन लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
सिद्धौर ब्लॉक के नकटा सेहरिया गांव के रमेश (30) हर साल साथियों के साथ महादेव के दर्शन को जाते थे। रविवार शाम को वह भी 14 किलोमीटर की पदयात्रा कर मंदिर पहुंचे थे। रमेश लखनऊ में रहकर दिहाड़ी मजदूरी करते थे। परिवार में पत्नी ललिता देवी आठ माह की गर्भवती हैं और दो साल का एक बेटा भी है। उनकी मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, ललिता बेहोश हो गईं। मां चंपा देवी और भाई फूलचंद और विशाल का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में हर जुबान पर बस यही सवाल है....अब ललिता और उनके बच्चों का क्या होगा।