बाराबंकी। गरीब अभिभावकों के करीब डेढ़ हजार बच्चे महंगी फीस लेने वाले निजी स्कूलों में बिलकुल मुफ्त पढ़ेंगे। इन बच्चों को यूनीफार्म व शैक्षिक सामग्री आदि के लिए पांच हजार रुपया भी मिलेगा। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत बेसिक शिक्षा विभाग ने दो चरण में 950 बच्चों का चयन कर संबंधित स्कूलों को पत्र भेज दिया है। तीसरे व अंतिम चरण के लिए 12 मई तक आवेदन मांगे गए है। जिले के करीब 60 स्कूलों में यह बच्चे पढ़ेंगे।
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत 6 साल से 14 साल के बच्चे को मुफ्त शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। इसी के तहत गरीब तबके के बच्चों के लिए निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटें आरक्षित की गई हैं। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आवेदन मांगे जाते हैं और फिर लाटरी सिस्टम से बच्चों के नाम तय किए जाते हैं। इस सत्र में गरीब बच्चों के चयन की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जा रही है। पहले चरण में छह फरवरी से 26 फरवरी तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे जिसमें 407 बच्चों का चयन किया गया। जबकि दूसरा चरण में 14 मार्च से छह अप्रैल तक मिले आवेदनों में से 443 बच्चों के नाम तय किए गए हैं। इस प्रकार अब तक 850 बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला कराने के लिए सूची बन चुकी है और विभाग संबंधित स्कूलों को इसकी सूचना दे रहा है। अभी तीसरे व अंतिम चरण के लिए 20 अप्रैल से 12 मई तक आवेदन लिए जा रहे हैं। 12 मई के बाद करीब 500 बच्चों के चयन का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। इस प्रकार गरीब तबके के करीब डेढ़ हजार बच्चों की कांवेंट स्कूलों में पढ़ाई कराई जाएगी। हर बच्चे को सीधे खाते में पांच हजार रुपये भी दिए जाएंगे।
मुफ्त पढ़ाई बच्चों का कानूनी अधिकार
एक अप्रैल 2010 को केंद्र सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम बनाया। सुप्रीम कोर्ट ने भी शिक्षा का अधिकार कानून पर मुहर लगाई है। इस कानून के तहत हर बच्चे को शिक्षा पाने का सवैंधानिक अधिकार मिला है। छह साल से 14 साल के बच्चे को मुफ्त शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार होगा। इन बच्चों को अपने आसपास के स्कूल में दाखिला लेने का अधिकार दिया गया है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत जिले में गरीब व वंचित समूह के बच्चों का निजी स्कूूलों में दाखिला कराया जा रहा है। दो चरण में 850 बच्चों के नाम तय हो चुके हैं। तीसरे चरण के लिए 12 मई तक ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं।
- संतोष देव पांडेय, बीएसए