बाराबंकी में गुरुवार को पुनर्वास केंद्र पर कुपोषित बच्चों को संतुलित आहार देती स्टाफ नर्स।
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जिले में पाए गए कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति अधिकारी सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं। वहीं जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र में ही आने वाले बच्चों के ही स्वास्थ्य में सुधार दिख रहा है।
कुपोषण मिटाने के लिए अधिकारियों ने गांव को गोद लेकर बच्चों को स्वस्थ्य कराने का जिम्मा उठाया था जो महज औपचारिकता तक ही सीमित रह गया। उपचार तो छोड़े, विभाग के अधिकारी कुपोषित बच्चों की संख्या में से कितनों का उपचार कर स्वस्थ किया गया, इसकी जानकारी भी नहीं बता पा रहे हैं।
बीते 15 सितंबर 2015 में वजन दिवस की रिपोर्ट के अनुसार जिले में 109496 कुपोषित आैर 22483 बच्चे अति कुपोषित पाए गए थे। जिनको जिला अस्पताल में बनाए गए पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराकर उपचार कराया जाना था।
पुनर्वास केेंद्र में 20 मार्च 2015 को पहली बच्ची गीता पुत्री अजय कुमार (भट्ठा मजदूर) को भर्ती कर उपचार किया गया। हालत में सुधार होने के बाद उसके परिवारीजनों को 1400 रुपये ई पेमेंट के माध्यम से खाते में भेज दिया गया। ऐसे अतिकुपोषित 14 अप्रैल तक 105 बच्चों का उपचार कर उन्हें घर भेजा गया है।
पुनर्वास केंद्र की स्टाफ नर्स रोहिनी पांडेय ने बताया कि यहां पर आने वाले कुपोषित बच्चों को संतुलित आहार, नियमित रूप से देकर बच्चों की ग्रोथ की जाती है। उसके बाद बच्चा स्वस्थ्य होने पर डिस्चार्ज कर दिया जाता है। इस दौरान पोषण केंद्र में बच्चे को 14 दिन भर्ती किया जाता है।
वहीं जिलाधिकारी से लेकर अन्य कई अधिकारियों के द्वारा गोद लिए गांवों के तमाम बच्चे अभी भी कुपोषण की चपेट में हैं। हैरत की बात यह है कि इस संबंध में अधिकारी जानकारी नहीं दे पा रहे हैं कि उनके गांव में कुपोषित बच्चों की संख्या कितनी है और कितनों को कुपोषण के दायरे से बाहर निकाला जा चुका है।