बाराबंकी। बेसिक शिक्षा विभाग की हाइटेक डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था सवालों के घेरे में है। प्रेरणा पोर्टल और यू-डायस के ताजा आंकड़ों ने प्रशासनिक दावों के पीछे जमीनी हकीकत बिल्कुल इतर है। पोर्टल पर दर्ज शानदार आंकड़ों के विपरीत जमीनी तौर पर विद्यालयों में कक्षाएं खाली पड़ी हैं। कागजी दाखिलों और वास्तविक उपस्थिति के बीच का यह बड़ा अंतर पूरी व्यवस्था की पोल खोल रहा है।
जिले के परिषदीय विद्यालयों में कुल 2,57,567 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। मगर रोजाना औसतन केवल 1,04,437 छात्र-छात्राएं ही कक्षाओं में पहुंच रहे हैं। इसका सीधा गणित यह है कि करीब 1,53,130 बच्चे यानी 59.45 प्रतिशत नौनिहाल रोजाना पढ़ाई से दूर हैं। नतीजतन पूरे जिले की कुल उपस्थिति का औसत महज 40.55 प्रतिशत पर टिका है। ब्लॉकवार आंकड़ों को देखें तो सूरतगंज में स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहां उपस्थिति का आंकड़ा मात्र 21.85 प्रतिशत ही दर्ज हुआ। इसके अलावा दरियाबाद में 25.46 प्रतिशत और रामनगर में 28.89 प्रतिशत विद्यार्थी ही स्कूल पहुंचे। ऑनलाइन हाजिरी की स्थिति यह है कि जिले के 2,618 परिषदीय स्कूलों में से 1,413 विद्यालयों ने डिजिटल उपस्थिति दर्ज ही नहीं की गई। विद्यार्थियों के अनिवार्य बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण में कुल 2,48,673 छात्रों में से 2,25,112 के पास आधार कार्ड उपलब्ध हैं। 58,120 बच्चों का बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अभी भी अटका हुआ है। बनीकोडर 12.28 फीसदी, देवा ब्लॉक 10.04 और सिरौलीगौसपुर 9.72 प्रतिशत पेंडेंसी के साथ सबसे पीछे चल रहे हैं। (संवाद)