बाराबंकी। नालियों का पानी बेकार न हो कर अब मछली पालन के काम आएगा। बूंद-बूंद पानी को इस्तेमाल में लाने के लिए डीएम के निर्देशन में एक कार्ययोजना तैयार की गई है। इस कार्ययोजना के तहत शहर के एक दर्जन तालाबों की सफाई कर उनमें नालियों का पानी एकत्रित कर हमेशा पानी से भरा रख कर, उनमें मछली पालन भी होगा। मछली पालन से न केवल नगर पालिका की आय बढ़ेगी वरन जिन्हें तालाब का पट्टा आवंटित होगा, उन्हें रोजगार भी मिलेगा। इस कार्ययोजना को अमल में लाने पर 14 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
नगर पालिका परिषद नवाबगंज के महुआरी पुरवा में एक तालाब का निर्माण मॉडल तालाब के रूप में कराया गया है, जिसमें आसपास के मोहल्ले की नालियों का पानी तीन तरह के चैंबर में शोधित होने के बाद तालाब में जा रहा है। इससे नाली का पानी भी उपयोग लायक बन गया है। इस तकनीक को देखकर डीएम ने नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी संजय कुमार शुक्ल को शहर के सभी तालाबों को इसी तरह विकसित कराने के लिए अपनी निगरानी में कार्ययोजना तैयार कराई है। जिनमें से पल्लरी के दो, बनवा का एक, जिन्हौली का एक तालाब में प्रथम चरण का काम जल्दी शुरू होगा। इसके अगले चरण में पैसार, बड़ेल, फैजुल्लागंज, नवीगंज, आलापुर, बबुरिहा व शुक्लाई वार्ड के तालाबों को अपग्रेड किया जाएगा।
एमबीबीआर तकनीक का होगा इस्तेमाल
नगर पालिका परिषद के ईओ संजय कुमार का कहना है कि तालाबों के पानी को तीन तरह के चैंबर बनाकर शोधित करने के तरीके को एमबीबीआर (मूविंग, बेड बॉयो रियेक्टर तकनीक) कहा जाता है। इसके लिए जिस क्षेत्र में तालाब होगा उस क्षेत्र की सभी नालियों को तालाब से जोड़ा जाएगा। तालाबों में नियमित जलस्रोत बनाए रखने का यह उचित माध्यम है। एक बार यूज किए गए पानी को शोधित कर दोबारा यूज किया जा सकता है। तालाबों को मछली पालन के लिए पट्टे पर देने से रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
चक्रतीर्थ की तरह विकसित होगा धनोखर तालाब
नगर के धनोखर तालाब को नीमसार के चक्रतीर्थ की तरह विकसित किया गया है लेकिन उचित देखभाल के अभाव में सूख जाता है, गंदगी भी होती है। डीएम शशांक त्रिपाठी के निर्देश पर नगर पालिका इसमें पानी की निकासी व पानी भरने की व्यवस्था कराएगा। सरोवर के किनारे खाली पड़ी जमीन पर बच्चों के खेलने के लिए झूले भी लगवाए जाएंगे।