परिषदीय स्कूलों में बुधवार को कोफ्ता चावल और उबला दूध देने का कार्यक्रम पहले दिन ही फ्लॉप हो गया। बीएसए ने अपने हाथों से जिन विद्यालयों में दूध का वितरण किया सिर्फ वहीं की योजना का असर दिखाई दिया। जिले के अधिकांश विद्यालयों ने कोफ्ता चावल तो दूर दूध तक बच्चों को नसीब नहीं हो सका है। कई विद्यालयों में प्रधानाचार्यों ने ग्राम प्रधान से दूध की मांग की थी, लेकिन प्रधान द्वारा दूध सप्लाई न किए जाने से योजना परवान नहीं चढ़ सकी है।
जिले में पूर्व माध्यमिक विद्यालयों की संख्या 846 है जिसमें करीब 94 हजार छात्र पंजीकृत हैं। वहीं प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 2170 है। जिसमें पौने तीन लाख छात्रों के पंजीकरण हुआ है।
सरकार द्वारा इन बच्चों को नए मेन्यू के अनुसार अब हर बुधवार को कोफ्ता चावल और प्रति छात्र को 200 एमएल दूध देने की योजना शुरू की गई। जिसके लिए सरकार ने पहले से ही सूबे के सभी जिलों के जिला बेसिक शिक्षाधिकारियों को परिषदीय विद्यालयों में दूध सप्लाई कराने की रूपरेखा तैयार कर पहले बुधवार को ही दूध वितरण करने के निर्देश दिए थे जिसका अनुपालन जिले में कुछ ही परिषदीय स्कूलों में दिखाई दिया। बाकी के अधिकांश विद्यालयों में कहीं स्कूल बंद रहे तो कहीं अध्यापिकाएं कार चलाने में मस्त रहीं तो कहीं प्रधानों ने दूध ही नहीं भिजवाया जिससे पहला बुधवार को यह योजना फुस्स हो गई।
यहां नहीं बंट सका दूध
तहसील रामसनेहीघाट व विकास खंड बन्नीकोडर के अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में दूध वितरण की योजना परवान नहीं चढ़ सकी है। जिसमें प्राथमिक विद्यालय मालिनपुर, मुरारपुर, भेंदुआ बहरेला व सूरजपुर योजना को मुंह चिढ़ाने के लिए काफी हैं। यहां के खंड शिक्षाधिकारी सतीश चंद्र त्रिपाठी का कहना है कि सभी विद्यालयों में दूध का वितरण मानक के अनुरूप किया गया है और जहां दूध वितरण नहीं हुुआ है उसकी जांच कराकर कार्रवाई करने का जुंगला पहले दिन से ही शुरू हो गया।
प्रधान ने दूध नहीं दिया तो क्या बांटे
विकास खंड फतेहपुर के प्राथमिक विद्यालय ईशेपुर में 97 बच्चों का पंजीकरण है बुधवार को स्कूल में मात्र 44 बच्चे ही मौजूद रहे। यहां की प्रधानाचार्य प्रभारी नेहा वर्मा ने बताया कि दूध के लिए ग्राम प्रधान कीढ़ीलाल द्वारा दूध न भेजवाने पर दूध का वितरण नहीं किया जा सका है।
वहीं प्राथमिक विद्यालय बन्नी सुलेमाबाद में कुल 161 बच्चों का पंजीकरण है जिसमें मौके पर 67 बच्चे की मौजूद पाए गए। यहां की प्रधानाचार्या यासमीन ने बताया कि यहां की ग्राम प्रधान जाकिया खातून को बुधवार को नए मेन्यू के अनुसार बच्चों को दूध वितरण करने की सूचना दी गई थी। उसके बाद भी प्रधान ने विद्यालय में दूध नहीं भेजा जिससे बच्चों को एमडीएम से ही संतुष्ट करना पड़ा। इस बाबत जब खंड शिक्षाधिकारी शिव सिंह ठाकुर से बात की गई तो मेटिंग का बहाना कर फोन काट दिया।
यहां पूरी की गई योजना की औपचारिकता
जिला बेसिक शिक्षाधिकारी पीएन सिंह ने बड़ेल स्थित तीनों विद्यालयों में अपने हाथों से बच्चों को 200 एमएल दूध वितरण कर योजना की शुरूआत की। उसके बाद सतरिख क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय गुलरिहा में प्रधानाध्यापक सुशील कुमार के साथ मिलकर 70 बच्चों को गर्म दूध वितरण किया गया। बीएसए ने सभी खंड शिक्षाधिकारियों के माध्यम से सभी परिषदीय विद्यालयों में दूध वितरण कराने के आदेश दिए, लेकिन जिले के अधिकांश विद्यालयों में इसका अनुपालन नहीं किया गया।
सभी विद्यालय में दूध का वितरण किया गया है। जिन विद्यालयों में दूध वितरण न होने की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
- पीएन सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी