जिले में मंगलवार को स्वाइन फ्लू की चपेट में आकर एक मरीज की मौत होने व उसके परिवार के पांच लोगों में लक्षण मिलने पर हाई अलर्ट जारी कर दिया गया। इसके बावजूद जिला अस्प्ताल में इसका कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। अस्पताल में न तो स्वाइन फ्लू में इस्तेमाल होने जीवन रक्षक टैमी फ्लू दवाई है और न ही इससे पीड़ित मरीजों को भर्ती किए जाने की व्यवस्था ही है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वाइन फ्लू के निपटने के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। दिखावे के लिए एक पुराने कमरे में चार बेड रख उसे आइसोलेशन वार्ड बना जरूर दिया गया पर आज तक उसका ताला तक नहीं खुल सका है। स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित होने वाली टैमी फ्लू की टेबलेट तक नहीं है।
इस वॉयरेस की चपेट में आने से एक की मौत के बाद भी जिले में जारी किए गए अलर्ट का असर अस्पताल में दिखाई नहीं दे रहा है। अधिकारियों का कहना है कि महानिदेशालय को पत्र भेजकर मास्क व टैमी फ्लू दवाओं की मांग की गई है।
जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. एसके शुक्ला ने बताया कि स्वाइन फ्लू का असर सबसे ज्यादा बुजुर्गों व बच्चों में होता है। बदलते मौसम में सबसे ज्यादा खानपान का विशेष ध्यान देना चाहिए। तेज बुखार, खांसी, सांस फूलना, बदन दर्द, कई दिनों से सर्दी व जुखाम होना व छींके आने पर चिकित्सक को दिखाकर ही दवा खाएं।