बाराबंकी। सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर न होने की वजह से मरीजों को बिना हाथ लगाए ही रेफरल परचा थमा दिया जाता है। इससे मरीज निजी अस्पतालों में जाकर महंगे दामों पर इलाज कराने के लिए मजबूर रहते हैं। इससे सबसे ज्यादा दिक्कतें प्रसव पीड़िताओं को होती है लेकिन इसका कोई हल नहीं निकल पा रहा है।
जिले में 21 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं लेकिन इनमें रामसनेहीघाट, फतेहपुर, हैदरगढ़ और रामनगर में ही सर्जन और ग्यानकोलॉजिस्ट तैनात हैं। अन्य 17 अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात नहीं हैं जबकि इन अस्पतालों की प्रतिदिन की ओपीडी 200 से 250 के आसपास है।
यहां पर सबसे ज्यादा प्रसव पीड़िताएं ही इलाज के लिए आती हैं परंतु विशेषज्ञ न होने की वजह से इन्हें तत्काल रेफरल परचा पकड़ा दिया जाता है।